My Humming Word

Inspiration

  1. Poem
Editor’s Pick A centenarian mango tree, branches wide,Leaves dancing high, wrinkles etched pretty vivid:Once I stood in Tagore Lawns, a witness to time,A tale of seasons, in earth’s whispered rhyme. In summer season’s heat, I offered shadeDuring torrential rains, I proffered a refugeWith autumn surge, leaves yellow-brown at fall Sweet fruits, like old memories, recalling […]
  1. Blog
एक दिन, मुझे एक प्रेरणादायक कहानी पढ़ने को मिली, जिसमें एक बुजुर्ग आदमी, तीन बेटे और परिवार की एकमात्र संपत्ति के रूप में 17 ऊंट थे। अपनी वृद्धावस्था की लम्बी बीमारी के बाद पिता की मृत्यु हो गई, और मृत्यु से पूर्व उन्होंने एक सीलबंद लिफाफे में अपनी वसीयत छोड़ दी। उनकी मृत्यु के बाद, […]
  1. Poem
Editor’s Pick सूर्यास्त का समय एक सुनसान समुद्र तट –वह आश्चर्य से देख रहा थास्थानीय निवासी झुककर कुछ उठाताऔर फिर दूर पानी में फेंक देता थावह इसी काम की पुनरावृत्ति में लगा था। उसने जिज्ञासावश पूछा – आप क्या कर रहे हैं?स्थानीय निवासी ने जवाब दिया – भाटा हैतारामछलियाँ तट पर आ गई हैंमैं उन्हें वापस […]
  1. Poem
दूसरों को करने से पहले, ख़ुद अपने को नमन करो।उजड़े हिये को कर आबाद, ईश्वर का भजन करो।। कंकालों की लीक पूज कर, आत्मा का दमन न करो।यश नाम की चिंता से बच कर उससे बहिर्गमन करो।। गुलामी के स्वर्ण मुकुट से अच्छा है प्यार कफन करो।संघर्ष करने का साहस नहीं, तो खुद को दफ़न […]
  1. Poem
मुझे तो है लगती, आपकी नाद बक़ा,सिने बूढ़े फ़नकारों की तो है एक फ़ना,मेरे लिए आपको कोई कॉपी करना,है वाकई एक काम चबाना लोहे चना। लेकिन, श्रीमन, यह है आदत एक बुरी,कि आप हर बात करते हैं मना मेरी,मुझे सिर्फ़ इतना बताओ कृपया, श्रीमन,कॉपी कोशिश करने में भी है कितने जन? जबकि आपकी आवाज़ में […]
  1. Poem
 तुम चलो तो चलो तो तुम बिलकुल अकेले आधुनिक सभ्यता के पाठ से सीखी चतुर विद्या को छोड़कर निपट अकेले रिक्त-रिक्त से पूर्वाग्रहों को त्यागकर अपने सदृश्य जीव की संगना से दूर हट एकदम अकेले मृत मंजिलों-इमारतों में सड़ रहीं वर्जनाओं के बाहर तुम चलो तो.  एक निस्सीम आकाश है  नीलाभ, पारदर्शी  कल्पना के आखिरी छोर तक अबूझ  रहस्यमयी  जिज्ञासा को कुदेरता अनंत से […]

Good Reads

​एक पुरानी हिंदी कहावत है “जिसकी लाठी उसकी भैंस“, जिसका शाब्दिक अर्थ है कि जिसके हाथ में लाठी होती है, भैंस उसी की होती है। सार रूप में, यह दर्शाता है कि जिसके पास धन और संसाधनों को नियंत्रित करने की शक्ति, ताकत या प्रभाव होता है, वह साधनों के न्याय या निष्पक्षता की परवाह […]

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प्रतिवर्ष दशानन दहन किया, मन के रावण का नाश नहीं,अगनित सीता अपहृत होती, निज मर्यादा का भास नहीं।हम एक जलाते दशकंधर, शत दशकंधर पैदा होते,करते जो दहन मन का रावण, हर गली में रावण न होते। इस शक्ति पर्व का हेतु है क्या, है ब्यर्थ दिखावे की शक्ती,निर्बल को संबल दे न सके, अन्याय से […]

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