My Humming Word

Paradox

  1. Poem
सत्य की ईंटों से, उसने भव्य मंदिर था रचा,छल-कपट के वेग से, जो सर्वदा रक्षित बचा;लोग जिसकी निष्ठा को नमन करते हर घड़ी,पर स्वयं के ही भाग्य से, प्रबल जंग है छिड़ी। बंधा रहा जो व्यक्ति सदा सत्य की मर्यादा से,अपराधी सिद्ध हुआ, एक प्रियजन के दुराव से;तमाम नतमस्तक हैं, जिसके अडिग चरित्र पर,हारा वह […]
  1. Poem
He is feisty, humorousAnd quick-witted everSo I asked him one dayTo describe it brieflyThe contrast of the loveIn its success and failure! Piquant and chucklesomeHe responded as follows – After failure in a love affairThe lover inevitably turns toPerpetual Poetry and ShayariTo recite and ordain MehfilsRoam around place to placeMapping hills, deserts and oceansTasting exotic […]

Good Reads

​न मुझे कोई आभास है, अब कोई सरोकार भी नहीं,ये शब्द तुम तक पहुँचें या खो जाएँ हवाओं में कहीं;सत्य एक शिलाखंड है – एकाकी, खुरदरा और निर्भ्रांत,जिस दिन तुम्हें खोया, मेरी दुनिया पर छा गई थी रात। लोग मुझे अक्सर कहते हैं, कि पाषाण सा अडिग हूँ मैंकिसे ज्ञात है, अपनी ही पीड़ा की […]

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​न मुझे कोई आभास है, अब कोई सरोकार भी नहीं,ये शब्द तुम तक पहुँचें या खो जाएँ हवाओं में कहीं;सत्य एक शिलाखंड है – एकाकी, खुरदरा और निर्भ्रांत,जिस दिन तुम्हें खोया, मेरी दुनिया पर छा गई थी रात। लोग मुझे अक्सर कहते हैं, कि पाषाण सा अडिग हूँ मैंकिसे ज्ञात है, अपनी ही पीड़ा की […]

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सूख चुके हैं प्रेमपात्र सब, मदिरा की गागर दे दो भूल चुका हूँ कौन कौन है, विस्मृति का आश्रय दे दो. ईश्वर सबकुछ भूल गया है, कृष्ण नही अब रथ पर हैंसत्य-प्रेम की राहों पर हम, फिर भी काँटे पथ पर हैं. जीवन बंधा-बंधा सा क्यों है, हाहाकार मचा यह क्यों है मानव संबंधों के तलतम  में, यह भूकंपी […]
लाख समझाने पर भी नहीं समझता आईना मेरा अंदर की टूटती नसें भी उकेर दीं बनाकर उसने दरकती लकीरें वो जो बैठे हैं गहरे दिल में मेरे आईना मेरा उन्हें भी हूबहू दिखाता है. कैसे छिपाऊँ दर्दे-दिल को सामने जब बैरी-मितवा हो ऐसा चुप हूँ मैं, चुप हैं वो, मंजर है खामोशी का यह कैसा. दिल की जिद है रग-रग में […]
समय चुप है अपनी निष्ठुरता लिए बदल रहा है निरंतर. तुम समय हो मेरे समय जिसने प्यार दिया अनंत डुबोकर किया एकाकार खुशियों से अमृत सुख की स्मृतियों से साँस साँस में चलती अनवरत सामीप्य की अव्यक्त अनुभूतियों से.     समय मेरा दूर असंबद्ध सा अबदर्शक सा बन बदल रहा है     सहारे तन के मन के     तुझसे जो बंधे थे अडिग अटूट  […]

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