My Humming Word

Dilemma

  1. Poem
भोर होने से प्रथम ही टूटते हैं स्वप्न सारे।खो रहे हैं नील नभ में शब्द जैसे रात्रि तारे।पोंछ कर दृग बिंदुओं को सच को सीने में छुपाये-पतित को पावन बनाने में पराजित अश्रु खारे। अनछुई इस देह ने स्पर्श के जो जख्म खाये।तन बदन की वेदना को उर पिटारी में संजोये।देखती कातर नयन से जो […]
  1. Poem
Why some peopledespite being in and aroundas friends or relativesare not able to impressor leave a markduring the life spanand till last! Why someoneeven until twilight of liferemains so attachedand nostalgicabout some event or personof the adolescentor teenage past! Why someoneduring the journey of lifemeets for a whileshares a few momentsdestined to separateyet missed alwaysand […]

Good Reads

​न मुझे कोई आभास है, अब कोई सरोकार भी नहीं,ये शब्द तुम तक पहुँचें या खो जाएँ हवाओं में कहीं;सत्य एक शिलाखंड है – एकाकी, खुरदरा और निर्भ्रांत,जिस दिन तुम्हें खोया, मेरी दुनिया पर छा गई थी रात। लोग मुझे अक्सर कहते हैं, कि पाषाण सा अडिग हूँ मैंकिसे ज्ञात है, अपनी ही पीड़ा की […]

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​न मुझे कोई आभास है, अब कोई सरोकार भी नहीं,ये शब्द तुम तक पहुँचें या खो जाएँ हवाओं में कहीं;सत्य एक शिलाखंड है – एकाकी, खुरदरा और निर्भ्रांत,जिस दिन तुम्हें खोया, मेरी दुनिया पर छा गई थी रात। लोग मुझे अक्सर कहते हैं, कि पाषाण सा अडिग हूँ मैंकिसे ज्ञात है, अपनी ही पीड़ा की […]

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सूख चुके हैं प्रेमपात्र सब, मदिरा की गागर दे दो भूल चुका हूँ कौन कौन है, विस्मृति का आश्रय दे दो. ईश्वर सबकुछ भूल गया है, कृष्ण नही अब रथ पर हैंसत्य-प्रेम की राहों पर हम, फिर भी काँटे पथ पर हैं. जीवन बंधा-बंधा सा क्यों है, हाहाकार मचा यह क्यों है मानव संबंधों के तलतम  में, यह भूकंपी […]
लाख समझाने पर भी नहीं समझता आईना मेरा अंदर की टूटती नसें भी उकेर दीं बनाकर उसने दरकती लकीरें वो जो बैठे हैं गहरे दिल में मेरे आईना मेरा उन्हें भी हूबहू दिखाता है. कैसे छिपाऊँ दर्दे-दिल को सामने जब बैरी-मितवा हो ऐसा चुप हूँ मैं, चुप हैं वो, मंजर है खामोशी का यह कैसा. दिल की जिद है रग-रग में […]
समय चुप है अपनी निष्ठुरता लिए बदल रहा है निरंतर. तुम समय हो मेरे समय जिसने प्यार दिया अनंत डुबोकर किया एकाकार खुशियों से अमृत सुख की स्मृतियों से साँस साँस में चलती अनवरत सामीप्य की अव्यक्त अनुभूतियों से.     समय मेरा दूर असंबद्ध सा अबदर्शक सा बन बदल रहा है     सहारे तन के मन के     तुझसे जो बंधे थे अडिग अटूट  […]

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