My Humming Word

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वह अब हमारे बीच नहीं रही। लगभग बीस वर्ष हो चुके हैं जब वह लगभग छियानवे वर्ष की परिपक्व आयु में अपने स्वर्गीय धाम को चली गईं। मेरी अपनी बढ़ती उम्र तथा पर्याप्त सांसारिक ज्ञान और अनुभव के बावजूद, मुझे आज तक उनके जैसी प्रकृति, बुद्धिमत्ता, स्वभाव और मानसिक दृढ़ता वाली कोई महिला नहीं मिली। […]
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​दिसंबर के अंत की गुनगुनी और सुहावनी धूप बूढ़ी कैथरीन की थकी हुई आँखों में न तो कोई आनंद ला सकी और न ही कोई आशा। इस वृद्धाश्रम के अहाते में, नीम के पेड़ के नीचे एक बेंच पर बैठी वह सुदूर अतीत की यादों में खोई हुई थी, जब डेविड जीवित थे और उन्हें […]
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शालिनी और रिचा हमेशा की तरह मुझे छोड़ने स्टेशन तक आये थे। जब भी मैं किसी लम्बे सरकारी दौरे पर बाहर जाता हूं वर्षों से यह दोनों बिना किसी अपवाद के मुझे ‘सी आफ’ करने आते रहे हैं। करीब आठ साल पहले डेपुटेशन पर दिल्ली आना हुआ था तब से यहीं का होकर रह गया। […]
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दूल्हा बने दीपक की कार उधर आंखों से ओझल हुई और इधर घर की औरतों ने अंदरआगन में अपने रंगारंग कार्यक्रम की तैयारियां शुरू कर दीं। अब तो कल दुल्हन के आने तकयहां नाच-गाने और स्वांग का यही सिलसिला चलता रहेगा। बरामदे में खड़ी सुमन ने पासखड़ी ललिता की ओर आंखों ही आंखो में इशारा […]
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             पिछले वसन्त में जब मेरी पड़ोसन श्रीमती वर्मा ने मुझे बताया कि मेरी गुड़िया सी बेटी मिनी अब हाथ पीले करने लायक हो गई है तो मेरे चेहरे का रंग ही उड़ गया।  हे भगवान! धिक्कार है मुझ जैसी मां को जिसे अपने बेटी के सयानी होने की खबर अपने पड़ोसियों से लगे।  अरे […]
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दोपहर का खाना खत्म कर के रोज की तरह विनोद बाहर बरामदे में निकल आये। रातभर रूक-रूक कर बरसने के बाद सुबह थोड़ा बादल छटे थे। लेकिन दोपहर में फिर अंधेरासा घिर आया था। बस बारिश बन्द थी। बाहर लान में आकर उन्होंने गार्डन-अम्ब्रेला के अन्दररखी हुई एक कुर्सी खींच कर बाहर निकाल ली। रोज […]

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सूख चुके हैं प्रेमपात्र सब, मदिरा की गागर दे दो भूल चुका हूँ कौन कौन है, विस्मृति का आश्रय दे दो. ईश्वर सबकुछ भूल गया है, कृष्ण नही अब रथ पर हैंसत्य-प्रेम की राहों पर हम, फिर भी काँटे पथ पर हैं. जीवन बंधा-बंधा सा क्यों है, हाहाकार मचा यह क्यों है मानव संबंधों के तलतम  में, यह भूकंपी […]
लाख समझाने पर भी नहीं समझता आईना मेरा अंदर की टूटती नसें भी उकेर दीं बनाकर उसने दरकती लकीरें वो जो बैठे हैं गहरे दिल में मेरे आईना मेरा उन्हें भी हूबहू दिखाता है. कैसे छिपाऊँ दर्दे-दिल को सामने जब बैरी-मितवा हो ऐसा चुप हूँ मैं, चुप हैं वो, मंजर है खामोशी का यह कैसा. दिल की जिद है रग-रग में […]
समय चुप है अपनी निष्ठुरता लिए बदल रहा है निरंतर. तुम समय हो मेरे समय जिसने प्यार दिया अनंत डुबोकर किया एकाकार खुशियों से अमृत सुख की स्मृतियों से साँस साँस में चलती अनवरत सामीप्य की अव्यक्त अनुभूतियों से.     समय मेरा दूर असंबद्ध सा अबदर्शक सा बन बदल रहा है     सहारे तन के मन के     तुझसे जो बंधे थे अडिग अटूट  […]

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