My Humming Word

Caring

  1. Poem
सभी भारतीयों के लिए हो शाश्वत गणतंत्र। आज़ादी और भारतीयता की मंगल कामना।। एक ही मोक्ष मार्ग दिखता, भगतसिंह सी अमरता।वसुधैव कुटुंबकम् भाव, रग रग में रहे झलकता।। धर्म कर्म चर्म से परे रहे, समरसता पर अटलता।वचन पर ही मरता जीता, ध्रुव पलटे तो पलटता।। रग रग में है खूँ खौलता, तमाम करेंगे सब निकृष्टता।रहे […]
  1. Poem
चाँद तनहा हैचाँद उदास हैपर क्या पता शायद यह बस मेरा भ्रम मात्र होचाँद का क्या कहनावह तो बस हर रोजमहीने के तीस दिन नये रंग बदलता है फिर भी…इतनी इच्छा बाकी हैउसकी चांदनी सर्वत्र होचमक कभी कम न होचाँद बस भरा पूरा रहेचाँद बस खिला खिला रहेवह कभी उदास न होवह कभी तनहा न हो Image […]

Good Reads

For a long time now, an interested network of global media houses, international research institutions, and foreign intelligence apparatuses—often referred to as the “Deep State”—coordinately deploy misinformation and false data to undermine India’s political sovereignty and economic growth. On their part, these institutions do not accept it as a subversion campaign, but as essential global […]
कीचड़ की कैद में थी झील की सोई हुई दृष्टि,अब नीलम-दर्पण बनकर जल ने पाई नव सृष्टि।कुमुदिनियों की अरुण हँसी बिखरी है लहरों पर,मानो उषा ने लिख दी हो कविता जल के अंतर। जहाँ जकड़े थे स्वप्न कभी दलदल की बेड़ियों में,वहीं आज जीवन गाता है हरीतिम छेड़ियों में।धुंधलाते क्षितिज से मुक्त हुआ अब यह […]

Worlwide

For a long time now, an interested network of global media houses, international research institutions, and foreign intelligence apparatuses—often referred to as the “Deep State”—coordinately deploy misinformation and false data to undermine India’s political sovereignty and economic growth. On their part, these institutions do not accept it as a subversion campaign, but as essential global […]
कीचड़ की कैद में थी झील की सोई हुई दृष्टि,अब नीलम-दर्पण बनकर जल ने पाई नव सृष्टि।कुमुदिनियों की अरुण हँसी बिखरी है लहरों पर,मानो उषा ने लिख दी हो कविता जल के अंतर। जहाँ जकड़े थे स्वप्न कभी दलदल की बेड़ियों में,वहीं आज जीवन गाता है हरीतिम छेड़ियों में।धुंधलाते क्षितिज से मुक्त हुआ अब यह […]

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प्रतिवर्ष दशानन दहन किया, मन के रावण का नाश नहीं,अगनित सीता अपहृत होती, निज मर्यादा का भास नहीं।हम एक जलाते दशकंधर, शत दशकंधर पैदा होते,करते जो दहन मन का रावण, हर गली में रावण न होते। इस शक्ति पर्व का हेतु है क्या, है ब्यर्थ दिखावे की शक्ती,निर्बल को संबल दे न सके, अन्याय से […]

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