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Caring

  1. Poem
अब यह न तो अनुराग की आसक्ति है,न ही स्मृतियों को संजोए रखने की याचना,यह तो मात्र अनंत शून्य के पार तैरती हुई…एक निःशब्द, मूक मनोकामना है—सीमाओं के भूगोल में घिरी, एकअदृश्य, निश्छल चेतना का स्पंदन मात्र,जो समाज अथवा नैतिकता के दायरों,सीमाओं या मर्यादाओं को स्वीकार कर भीदिशाहीन गगन में पंख फैलाती है. ​कारण..!वर्षों पूर्व […]
  1. Poem
सभी भारतीयों के लिए हो शाश्वत गणतंत्र। आज़ादी और भारतीयता की मंगल कामना।। एक ही मोक्ष मार्ग दिखता, भगतसिंह सी अमरता।वसुधैव कुटुंबकम् भाव, रग रग में रहे झलकता।। धर्म कर्म चर्म से परे रहे, समरसता पर अटलता।वचन पर ही मरता जीता, ध्रुव पलटे तो पलटता।। रग रग में है खूँ खौलता, तमाम करेंगे सब निकृष्टता।रहे […]
  1. Poem
चाँद तनहा हैचाँद उदास हैपर क्या पता शायद यह बस मेरा भ्रम मात्र होचाँद का क्या कहनावह तो बस हर रोजमहीने के तीस दिन नये रंग बदलता है फिर भी…इतनी इच्छा बाकी हैउसकी चांदनी सर्वत्र होचमक कभी कम न होचाँद बस भरा पूरा रहेचाँद बस खिला खिला रहेवह कभी उदास न होवह कभी तनहा न हो Image […]

Good Reads

Happiness and joy are emotionsthat produce conscious feelingsof safety, peace and vibrant energy,Combined with euphoria and gratitude;yet they are transient and fleeting,brain chemistry resets after a while,emotional fatigue sets in,and one returns to his baseline. In stark defiance,Pain touches the human hearteven more closely than joy,it silently walks beside man,like a shadow without a voice;a […]

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Happiness and joy are emotionsthat produce conscious feelingsof safety, peace and vibrant energy,Combined with euphoria and gratitude;yet they are transient and fleeting,brain chemistry resets after a while,emotional fatigue sets in,and one returns to his baseline. In stark defiance,Pain touches the human hearteven more closely than joy,it silently walks beside man,like a shadow without a voice;a […]

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सूख चुके हैं प्रेमपात्र सब, मदिरा की गागर दे दो भूल चुका हूँ कौन कौन है, विस्मृति का आश्रय दे दो. ईश्वर सबकुछ भूल गया है, कृष्ण नही अब रथ पर हैंसत्य-प्रेम की राहों पर हम, फिर भी काँटे पथ पर हैं. जीवन बंधा-बंधा सा क्यों है, हाहाकार मचा यह क्यों है मानव संबंधों के तलतम  में, यह भूकंपी […]
लाख समझाने पर भी नहीं समझता आईना मेरा अंदर की टूटती नसें भी उकेर दीं बनाकर उसने दरकती लकीरें वो जो बैठे हैं गहरे दिल में मेरे आईना मेरा उन्हें भी हूबहू दिखाता है. कैसे छिपाऊँ दर्दे-दिल को सामने जब बैरी-मितवा हो ऐसा चुप हूँ मैं, चुप हैं वो, मंजर है खामोशी का यह कैसा. दिल की जिद है रग-रग में […]
समय चुप है अपनी निष्ठुरता लिए बदल रहा है निरंतर. तुम समय हो मेरे समय जिसने प्यार दिया अनंत डुबोकर किया एकाकार खुशियों से अमृत सुख की स्मृतियों से साँस साँस में चलती अनवरत सामीप्य की अव्यक्त अनुभूतियों से.     समय मेरा दूर असंबद्ध सा अबदर्शक सा बन बदल रहा है     सहारे तन के मन के     तुझसे जो बंधे थे अडिग अटूट  […]

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