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Month: May 2020

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गाथा आत्मनिर्भरता और निर्यात उछाल की ​पिछले एक दशक से अधिक समय के दौरान, भारत का रक्षा निर्यात देश की रणनीतिक और आर्थिक आकांक्षाओं और विकास के एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में उभरा है, जो इसके रणनीतिक उपकरणों और हथियारों की घरेलू रक्षा निर्माण क्षमताओं के निरंतर हो रहे बदलाव को दर्शाता है। “मेक […]
Saga of Self-Reliance & Export Boom During the last over one decade, India’s defence exports have emerged as a significant pillar of the country’s strategic and economic aspirations and growth, simultaneously reflecting the steady transformation of its indigenous defence manufacturing capabilities of even the strategic equipment and weaponry. Driven by the vision and mission of […]

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गाथा आत्मनिर्भरता और निर्यात उछाल की ​पिछले एक दशक से अधिक समय के दौरान, भारत का रक्षा निर्यात देश की रणनीतिक और आर्थिक आकांक्षाओं और विकास के एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में उभरा है, जो इसके रणनीतिक उपकरणों और हथियारों की घरेलू रक्षा निर्माण क्षमताओं के निरंतर हो रहे बदलाव को दर्शाता है। “मेक […]
Saga of Self-Reliance & Export Boom During the last over one decade, India’s defence exports have emerged as a significant pillar of the country’s strategic and economic aspirations and growth, simultaneously reflecting the steady transformation of its indigenous defence manufacturing capabilities of even the strategic equipment and weaponry. Driven by the vision and mission of […]

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सूख चुके हैं प्रेमपात्र सब, मदिरा की गागर दे दो भूल चुका हूँ कौन कौन है, विस्मृति का आश्रय दे दो. ईश्वर सबकुछ भूल गया है, कृष्ण नही अब रथ पर हैंसत्य-प्रेम की राहों पर हम, फिर भी काँटे पथ पर हैं. जीवन बंधा-बंधा सा क्यों है, हाहाकार मचा यह क्यों है मानव संबंधों के तलतम  में, यह भूकंपी […]
लाख समझाने पर भी नहीं समझता आईना मेरा अंदर की टूटती नसें भी उकेर दीं बनाकर उसने दरकती लकीरें वो जो बैठे हैं गहरे दिल में मेरे आईना मेरा उन्हें भी हूबहू दिखाता है. कैसे छिपाऊँ दर्दे-दिल को सामने जब बैरी-मितवा हो ऐसा चुप हूँ मैं, चुप हैं वो, मंजर है खामोशी का यह कैसा. दिल की जिद है रग-रग में […]
समय चुप है अपनी निष्ठुरता लिए बदल रहा है निरंतर. तुम समय हो मेरे समय जिसने प्यार दिया अनंत डुबोकर किया एकाकार खुशियों से अमृत सुख की स्मृतियों से साँस साँस में चलती अनवरत सामीप्य की अव्यक्त अनुभूतियों से.     समय मेरा दूर असंबद्ध सा अबदर्शक सा बन बदल रहा है     सहारे तन के मन के     तुझसे जो बंधे थे अडिग अटूट  […]

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