My Humming Word

Poem

  1. Poem
​Where Adriatic stone runs quite deep and coldIn karst-locked rivers, pretty dark, silent and oldDeep in the dark, where silent waters crawlThe baffling olm abides within its limestone hall. Pale and unpigmented, like phantom lace arrayedA slender and subterranean proteus is portrayedCrimson plumes of lace adorn its sightless headAnd three-toed limbs through silent waters tread. […]
  1. Poem
कीचड़ की कैद में थी झील की सोई हुई दृष्टि,अब नीलम-दर्पण बनकर जल ने पाई नव सृष्टि।कुमुदिनियों की अरुण हँसी बिखरी है लहरों पर,मानो उषा ने लिख दी हो कविता जल के अंतर। जहाँ जकड़े थे स्वप्न कभी दलदल की बेड़ियों में,वहीं आज जीवन गाता है हरीतिम छेड़ियों में।धुंधलाते क्षितिज से मुक्त हुआ अब यह […]

Good Reads

The Narrative & The Metrics For a long time now, an interested network of global media houses, international research institutions, and foreign intelligence apparatuses—often referred to as the “Deep State”—coordinately deploy misinformation and false data to undermine India’s political sovereignty and economic growth. On their part, these institutions do not accept it as a subversion […]
कीचड़ की कैद में थी झील की सोई हुई दृष्टि,अब नीलम-दर्पण बनकर जल ने पाई नव सृष्टि।कुमुदिनियों की अरुण हँसी बिखरी है लहरों पर,मानो उषा ने लिख दी हो कविता जल के अंतर। जहाँ जकड़े थे स्वप्न कभी दलदल की बेड़ियों में,वहीं आज जीवन गाता है हरीतिम छेड़ियों में।धुंधलाते क्षितिज से मुक्त हुआ अब यह […]

Worlwide

Trending

सूख चुके हैं प्रेमपात्र सब, मदिरा की गागर दे दो भूल चुका हूँ कौन कौन है, विस्मृति का आश्रय दे दो. ईश्वर सबकुछ भूल गया है, कृष्ण नही अब रथ पर हैंसत्य-प्रेम की राहों पर हम, फिर भी काँटे पथ पर हैं. जीवन बंधा-बंधा सा क्यों है, हाहाकार मचा यह क्यों है मानव संबंधों के तलतम  में, यह भूकंपी […]
लाख समझाने पर भी नहीं समझता आईना मेरा अंदर की टूटती नसें भी उकेर दीं बनाकर उसने दरकती लकीरें वो जो बैठे हैं गहरे दिल में मेरे आईना मेरा उन्हें भी हूबहू दिखाता है. कैसे छिपाऊँ दर्दे-दिल को सामने जब बैरी-मितवा हो ऐसा चुप हूँ मैं, चुप हैं वो, मंजर है खामोशी का यह कैसा. दिल की जिद है रग-रग में […]
समय चुप है अपनी निष्ठुरता लिए बदल रहा है निरंतर. तुम समय हो मेरे समय जिसने प्यार दिया अनंत डुबोकर किया एकाकार खुशियों से अमृत सुख की स्मृतियों से साँस साँस में चलती अनवरत सामीप्य की अव्यक्त अनुभूतियों से.     समय मेरा दूर असंबद्ध सा अबदर्शक सा बन बदल रहा है     सहारे तन के मन के     तुझसे जो बंधे थे अडिग अटूट  […]

Login

You cannot copy content of this page