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Humour

  1. Article
डॉ. जयपाल सिंह यह कहानी कई सदियों पुरानी है। तत्कालीन बगदाद के एक छोटे से शहर में अलादीन नाम का एक सज्जन अपनी पत्नी, दो बच्चों और माता-पिता के साथ रहता था। वह बंदा इतना लापरवाह और आलसी था कि अधिकांश समय बेकार बैठा रहता था और अपनी पत्नी पर परिवार के लिए रोटी-रोजी कमाने […]
  1. Poem
उठो मित्र अब मोबाइल उठा लो,फिर थोड़ा तुम आनन्दित हो लो। बीत गई रात, अब यह नई सुबह है,पर हमको इस सबसे क्या लेना-देना। झट फेसबुक और व्हाट्सऐप खोलो,व जीवन का यह चरम सुख ले लो। ढेरों तो अग्रसारित संदेश हैं लम्बित,रोचक मीम्स और चलचित्र जमा हैं। भूल जाओ कि चिड़ियाँ चहकीं, अथवाफिर कमल खिले, […]

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सूख चुके हैं प्रेमपात्र सब, मदिरा की गागर दे दो भूल चुका हूँ कौन कौन है, विस्मृति का आश्रय दे दो. ईश्वर सबकुछ भूल गया है, कृष्ण नही अब रथ पर हैंसत्य-प्रेम की राहों पर हम, फिर भी काँटे पथ पर हैं. जीवन बंधा-बंधा सा क्यों है, हाहाकार मचा यह क्यों है मानव संबंधों के तलतम  में, यह भूकंपी […]
लाख समझाने पर भी नहीं समझता आईना मेरा अंदर की टूटती नसें भी उकेर दीं बनाकर उसने दरकती लकीरें वो जो बैठे हैं गहरे दिल में मेरे आईना मेरा उन्हें भी हूबहू दिखाता है. कैसे छिपाऊँ दर्दे-दिल को सामने जब बैरी-मितवा हो ऐसा चुप हूँ मैं, चुप हैं वो, मंजर है खामोशी का यह कैसा. दिल की जिद है रग-रग में […]
समय चुप है अपनी निष्ठुरता लिए बदल रहा है निरंतर. तुम समय हो मेरे समय जिसने प्यार दिया अनंत डुबोकर किया एकाकार खुशियों से अमृत सुख की स्मृतियों से साँस साँस में चलती अनवरत सामीप्य की अव्यक्त अनुभूतियों से.     समय मेरा दूर असंबद्ध सा अबदर्शक सा बन बदल रहा है     सहारे तन के मन के     तुझसे जो बंधे थे अडिग अटूट  […]

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