My Humming Word

Longing

  1. Poem
हर एक गोधूलि की शुरुआत,शरीर के साथ मेरा मन भीथका और बोझिल सा हो जाता हैफिर हताश मन तरसता रहता हैआपकी मधुर वाणी और निकाय के स्नेहिल और स्निग्ध स्पर्श सुखका एहसास एक बार फिर सेजीवन में पाने और जीने के लिए… मानो गहराती हुई रात कीनीरवता एवं स्तब्धता के बीचभयावह अग्नि की ज्वाला उठी […]
  1. Poem
A bit tiny yet marvellousShimmering white paniclesOf the Rajnigandha blooms…Their candidly sweet fragranceReminds few golden momentsThen my heart over againTurns distraught and restlessYearning those bygone days… During a span of timeLife was so fragrant withThe divine Rajnigandha touchSome sweet Rajnigandha feelingsAnd adorable Rajnigandha momentsInstead more apt to say…Rajnigandha memories and dreams. Like the fireflies glow […]
  1. Poem
घर के बाहर लान कीहरी-भरी मखमली घास परचमकीली गुनगुनी धूप मेंपसंदीदा आरामकुर्सी परदोनों आँखें बंद, चंचल मनकिसी की मधुर यादों में खोयावह चिंतन में तल्लीन है… शिशिर ऋतु के मौसम मेंसाल के इस सबसे ठंडे दिनजीवन के इस पड़ाव परकाश इस नर्म गुनगुनी धूप सेइतर ये दिन और ज्यादासुखद, सेहतमंद एवं सुंदरललित और मनभावन होते..! […]
  1. Poem
तुम्हारी सूरत और सीरत की कशिश थी,या फिर मेरी चाहत की शिद्दत का कमाल.एक व्यग्र हृदय एवं मन की उलझनों केचक्रव्यूह में उलझा मानों एक मकड़जाल. चाहे जितना तुमको भुलाने की कोशिश की,तुम हमेशा ही मुझको उतना ही याद आए.तुम्हारी यादों की परछाई संग चलते-चलते,देखो न आज हम कितनी दूर निकल आए. एक बेहद लम्बा […]

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सूख चुके हैं प्रेमपात्र सब, मदिरा की गागर दे दो भूल चुका हूँ कौन कौन है, विस्मृति का आश्रय दे दो. ईश्वर सबकुछ भूल गया है, कृष्ण नही अब रथ पर हैंसत्य-प्रेम की राहों पर हम, फिर भी काँटे पथ पर हैं. जीवन बंधा-बंधा सा क्यों है, हाहाकार मचा यह क्यों है मानव संबंधों के तलतम  में, यह भूकंपी […]
लाख समझाने पर भी नहीं समझता आईना मेरा अंदर की टूटती नसें भी उकेर दीं बनाकर उसने दरकती लकीरें वो जो बैठे हैं गहरे दिल में मेरे आईना मेरा उन्हें भी हूबहू दिखाता है. कैसे छिपाऊँ दर्दे-दिल को सामने जब बैरी-मितवा हो ऐसा चुप हूँ मैं, चुप हैं वो, मंजर है खामोशी का यह कैसा. दिल की जिद है रग-रग में […]
समय चुप है अपनी निष्ठुरता लिए बदल रहा है निरंतर. तुम समय हो मेरे समय जिसने प्यार दिया अनंत डुबोकर किया एकाकार खुशियों से अमृत सुख की स्मृतियों से साँस साँस में चलती अनवरत सामीप्य की अव्यक्त अनुभूतियों से.     समय मेरा दूर असंबद्ध सा अबदर्शक सा बन बदल रहा है     सहारे तन के मन के     तुझसे जो बंधे थे अडिग अटूट  […]

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