My Humming Word

Society

  1. Poem
विस्तृत, गहन अरण्य, चित्तीदार शिकारी दबे पाँव चलते हैंजुड़ाव उनके रक्त से नहीं, लोभ की दमघोंटू गंध से बंधे हैंपीली आँखों में धधकती भूख, जबड़ों में छिपा विश्वासघातजंगल के स्वर्ण-हृदय सम्राट पर धोखे से घात लगाते हैं। अकेला एक लोलुप, वन सम्राट की चाल नहीं तोड़ सकतापर क्रूर, उन्मादी समूह से बच निकलने का भी […]
  1. Blog
मानवीय रिश्ते चाहे वह आनुवंशिक हों अथवा मित्रता के बहुत संवेदनशील होते हैं जिन्हें अच्छा और मजबूत बनाए रखने के लिए लगातार सकारात्मक सोच एवं पहल के साथ-साथ परस्पर विश्वास की आवश्यकता बनी रहती है। इसके ठीक विपरीत जो लोग निजी स्वार्थ और आत्मकेन्द्रित रहकर रिश्ते निभाने का प्रयास करते हैं उन्हें अक्सर असफलता एवं […]
  1. Poem
Editor’s Choice ‘Enjoy’ is the familiar buzzwordFashionable and popular these days When I solemnly look aroundA host of my friends and relativesAs also many folks known – unknownEveryone seems running to enjoy lifeAnd merry-making their own ways…In restaurant, theatre, sports, picnic spots,Or copious visits to inland and exotic localeAnd narrating story for others to “enjoy”. […]
  1. Poem
मंत्री फिरे बावला लियों, हर दिन गाड़ी बत्ती लाल,कानून बिगड़ हुआ, हुआ घणा बेजा हाल। रिश्वतखोरी नियम बन गई, चरे नेताजी चोखा माल,जवा ज्यों मिनखों ने चूसे, डौडी टोपी डौडी चाल। राज मेहकमो में घुस गिया, सब के सब भाई दलाल,रिश्वतखोरी सूं, जनता ने करे, बाबु-अफ़सर रोज़ हलाल,। ऐ तो कोई नेता नहीं भाई, सब […]

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