My Humming Word

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एक सक्रिय व्यक्तिगत और व्यावसायिक (सामाजिक) जीवन जीते हुए, आपका सामना हर तरह के लोगों और अनुभवों से होता है। अपने वर्षों के लंबे सामाजिक जीवन के दौरान, मैंने हजारों व्यक्तियों से मुलाकात और व्यवहार किया है—जिनमें कई प्रशंसक रहे तो आलोचक भी। किंतु यहाँ जिस व्यक्ति का उल्लेख किया जा रहा है, वह ‘संज्ञानात्मक […]
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अनादि काल से दुनिया भर के विद्वानों, दार्शनिकों और धार्मिक गुरुओं ने विभिन्न संस्कृतियों और धर्मों में अलग-अलग नामों और रूपों में ईश्वर की प्रकृति और गुणों की व्याख्या और वर्णन किया है। वास्तव में, आधुनिक युग में दो अब्राहमिक (Abrahamic) धर्मों के विद्वानों और अनुयायियों ने तो आक्रामक रूप से अक्सर यह दावा, और […]
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For centuries, global politics has largely operated under the crude maxim that might makes right. Nations have traditionally been judged by the size of their Gross Domestic Product (GDP), the scale of their military arsenal, and their technological supremacy. Many widely used global indices have also emerged largely from Western institutional frameworks and, at times, […]
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एक दिन, मुझे एक प्रेरणादायक कहानी पढ़ने को मिली, जिसमें एक बुजुर्ग आदमी, तीन बेटे और परिवार की एकमात्र संपत्ति के रूप में 17 ऊंट थे। अपनी वृद्धावस्था की लम्बी बीमारी के बाद पिता की मृत्यु हो गई, और मृत्यु से पूर्व उन्होंने एक सीलबंद लिफाफे में अपनी वसीयत छोड़ दी। उनकी मृत्यु के बाद, […]
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Editor’s Pick Among universal negative attributes, anger and mistrust are twosome that cause maximum discomfort and harm to the practicing person and his (or her) relationship with others. We all know that the sour relationship may become a toxic exchange of hurtful words and utterances, impaired trust, and emotional and physical abuse. Anger is one […]
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जब विचार मरते हैं, तब समाज केवल शरीरों का समूह रह जाता है – संवेदनहीन, दिशाहीन व विनाश की ओर अग्रसर। आज का समाज निःसंदेह तकनीकी प्रगति तथा भौतिक समृद्धि की नई ऊँचाइयों पर है, किंतु भीतर ही भीतर वह एक अदृश्य संकट से गुजर रहा है। यह संकट कोई महामारी नहीं, कोई युद्ध नहीं, […]

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प्रतिवर्ष दशानन दहन किया, मन के रावण का नाश नहीं,अगनित सीता अपहृत होती, निज मर्यादा का भास नहीं।हम एक जलाते दशकंधर, शत दशकंधर पैदा होते,करते जो दहन मन का रावण, हर गली में रावण न होते। इस शक्ति पर्व का हेतु है क्या, है ब्यर्थ दिखावे की शक्ती,निर्बल को संबल दे न सके, अन्याय से […]

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