My Humming Word

Month: July 2025

  1. Poem
Humanity means simply being humanThe characteristic that encompassesThe attributes defining a person withKindness, empathy, love and compassion. Undoubtedly, these are unique attributesThat so distinctly define the human raceFrom all remaining species on this planetAltruistic ethics combines with these virtues. It’s a virtue for a man to be just and kindIf from that perspective arises a […]
  1. Blog
जब विचार मरते हैं, तब समाज केवल शरीरों का समूह रह जाता है – संवेदनहीन, दिशाहीन व विनाश की ओर अग्रसर। आज का समाज निःसंदेह तकनीकी प्रगति तथा भौतिक समृद्धि की नई ऊँचाइयों पर है, किंतु भीतर ही भीतर वह एक अदृश्य संकट से गुजर रहा है। यह संकट कोई महामारी नहीं, कोई युद्ध नहीं, […]

Good Reads

Editor’s Pick Ever listened to a whisper of silence?With the breath paused, life standstillEpic narrative of a legendary romanceNo, it’s not gleeful, still it’s graceful. Life didn’t stay extraordinaryLife wasn’t any unique marvel evenBut it didn’t occur run-of-the-mill eitherWhatever came in balance was bountiful. It was within latitude during lifeBe it the dawn, midnoon or […]
दिव्य आभा मानिंद है, यह सृष्टि का सुन्दर रूपयह दर्पण भी है, मानव की विवेकानुभूति अनूपघड़ी के बारह बजे, खुलते कितने ही पृष्ठ सफेदमानों क्षितिज पर हैं भविष्य की गाथा रचते छन्द. पुराना वर्ष थम गया, आधी रात के कोलाहल मेंनये का आगमन हुआ, प्रकाश की प्रथम पुंज मेंदिनों की एक कोमल डोर, बीते समय […]

Worlwide

Editor’s Pick Ever listened to a whisper of silence?With the breath paused, life standstillEpic narrative of a legendary romanceNo, it’s not gleeful, still it’s graceful. Life didn’t stay extraordinaryLife wasn’t any unique marvel evenBut it didn’t occur run-of-the-mill eitherWhatever came in balance was bountiful. It was within latitude during lifeBe it the dawn, midnoon or […]
दिव्य आभा मानिंद है, यह सृष्टि का सुन्दर रूपयह दर्पण भी है, मानव की विवेकानुभूति अनूपघड़ी के बारह बजे, खुलते कितने ही पृष्ठ सफेदमानों क्षितिज पर हैं भविष्य की गाथा रचते छन्द. पुराना वर्ष थम गया, आधी रात के कोलाहल मेंनये का आगमन हुआ, प्रकाश की प्रथम पुंज मेंदिनों की एक कोमल डोर, बीते समय […]

Trending

सूख चुके हैं प्रेमपात्र सब, मदिरा की गागर दे दो भूल चुका हूँ कौन कौन है, विस्मृति का आश्रय दे दो. ईश्वर सबकुछ भूल गया है, कृष्ण नही अब रथ पर हैंसत्य-प्रेम की राहों पर हम, फिर भी काँटे पथ पर हैं. जीवन बंधा-बंधा सा क्यों है, हाहाकार मचा यह क्यों है मानव संबंधों के तलतम  में, यह भूकंपी […]
लाख समझाने पर भी नहीं समझता आईना मेरा अंदर की टूटती नसें भी उकेर दीं बनाकर उसने दरकती लकीरें वो जो बैठे हैं गहरे दिल में मेरे आईना मेरा उन्हें भी हूबहू दिखाता है. कैसे छिपाऊँ दर्दे-दिल को सामने जब बैरी-मितवा हो ऐसा चुप हूँ मैं, चुप हैं वो, मंजर है खामोशी का यह कैसा. दिल की जिद है रग-रग में […]
समय चुप है अपनी निष्ठुरता लिए बदल रहा है निरंतर. तुम समय हो मेरे समय जिसने प्यार दिया अनंत डुबोकर किया एकाकार खुशियों से अमृत सुख की स्मृतियों से साँस साँस में चलती अनवरत सामीप्य की अव्यक्त अनुभूतियों से.     समय मेरा दूर असंबद्ध सा अबदर्शक सा बन बदल रहा है     सहारे तन के मन के     तुझसे जो बंधे थे अडिग अटूट  […]

Login

You cannot copy content of this page