My Humming Word

Month: February 2021

  1. Article
दूल्हा बने दीपक की कार उधर आंखों से ओझल हुई और इधर घर की औरतों ने अंदरआगन में अपने रंगारंग कार्यक्रम की तैयारियां शुरू कर दीं। अब तो कल दुल्हन के आने तकयहां नाच-गाने और स्वांग का यही सिलसिला चलता रहेगा। बरामदे में खड़ी सुमन ने पासखड़ी ललिता की ओर आंखों ही आंखो में इशारा […]
  1. Article
             पिछले वसन्त में जब मेरी पड़ोसन श्रीमती वर्मा ने मुझे बताया कि मेरी गुड़िया सी बेटी मिनी अब हाथ पीले करने लायक हो गई है तो मेरे चेहरे का रंग ही उड़ गया।  हे भगवान! धिक्कार है मुझ जैसी मां को जिसे अपने बेटी के सयानी होने की खबर अपने पड़ोसियों से लगे।  अरे […]
  1. Article
दोपहर का खाना खत्म कर के रोज की तरह विनोद बाहर बरामदे में निकल आये। रातभर रूक-रूक कर बरसने के बाद सुबह थोड़ा बादल छटे थे। लेकिन दोपहर में फिर अंधेरासा घिर आया था। बस बारिश बन्द थी। बाहर लान में आकर उन्होंने गार्डन-अम्ब्रेला के अन्दररखी हुई एक कुर्सी खींच कर बाहर निकाल ली। रोज […]
  1. Article
The Glory of Ancient Roman Civilization The world civilization history offers certain interesting yet ironic paradoxes too. For instance, Europe has now taken a distinct lead over the rest of the world in general prosperity and development in the modern age. On the other hand, while ancient civilizations like Indian, Egyptian, Sumerian, and so on, […]

Good Reads

Misconception and Misunderstandings -II (A)  Philosophy and Metaphysics (Contd…) (2)   Hinduism lacks a single central core or historical unity This narrative is a typical way of Western ethos of describing Indian ancient history and culture. During the British colonial era, the rulers, Western historians and scholars purportedly depicted it a civilization with narrow vision largely […]
एक सक्रिय व्यक्तिगत और व्यावसायिक (सामाजिक) जीवन जीते हुए, आपका सामना हर तरह के लोगों और अनुभवों से होता है। अपने वर्षों के लंबे सामाजिक जीवन के दौरान, मैंने हजारों व्यक्तियों से मुलाकात और व्यवहार किया है—जिनमें कई प्रशंसक रहे तो आलोचक भी। किंतु यहाँ जिस व्यक्ति का उल्लेख किया जा रहा है, वह ‘संज्ञानात्मक […]

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सूख चुके हैं प्रेमपात्र सब, मदिरा की गागर दे दो भूल चुका हूँ कौन कौन है, विस्मृति का आश्रय दे दो. ईश्वर सबकुछ भूल गया है, कृष्ण नही अब रथ पर हैंसत्य-प्रेम की राहों पर हम, फिर भी काँटे पथ पर हैं. जीवन बंधा-बंधा सा क्यों है, हाहाकार मचा यह क्यों है मानव संबंधों के तलतम  में, यह भूकंपी […]
लाख समझाने पर भी नहीं समझता आईना मेरा अंदर की टूटती नसें भी उकेर दीं बनाकर उसने दरकती लकीरें वो जो बैठे हैं गहरे दिल में मेरे आईना मेरा उन्हें भी हूबहू दिखाता है. कैसे छिपाऊँ दर्दे-दिल को सामने जब बैरी-मितवा हो ऐसा चुप हूँ मैं, चुप हैं वो, मंजर है खामोशी का यह कैसा. दिल की जिद है रग-रग में […]
समय चुप है अपनी निष्ठुरता लिए बदल रहा है निरंतर. तुम समय हो मेरे समय जिसने प्यार दिया अनंत डुबोकर किया एकाकार खुशियों से अमृत सुख की स्मृतियों से साँस साँस में चलती अनवरत सामीप्य की अव्यक्त अनुभूतियों से.     समय मेरा दूर असंबद्ध सा अबदर्शक सा बन बदल रहा है     सहारे तन के मन के     तुझसे जो बंधे थे अडिग अटूट  […]

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