My Humming Word

Month: June 2024

  1. Poem
अराजकता मात्र एक राजनैतिक दर्शन ही नहींबल्कि एक बिगड़ी सामाजिक संस्कृति भी हैजिससे उन्मादित-ग्रसित एक अराजक इंसान हठधर्मी के साथ हावी होने में रहता है संलग्न। यह आदमी अपने विद्रोही व्यक्तित्व के कारणकरता फिरता है हरकतें बचकानी और विलक्षण व्यक्तिपरक, बगावती, छिद्रान्वेषी व अहंकारी तेवरफिर परस्पर अतिछादी तर्क व जुनून जैसे अवगुण। यह आदमी अकसर रहता है आत्ममुग्ध, […]

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सूख चुके हैं प्रेमपात्र सब, मदिरा की गागर दे दो भूल चुका हूँ कौन कौन है, विस्मृति का आश्रय दे दो. ईश्वर सबकुछ भूल गया है, कृष्ण नही अब रथ पर हैंसत्य-प्रेम की राहों पर हम, फिर भी काँटे पथ पर हैं. जीवन बंधा-बंधा सा क्यों है, हाहाकार मचा यह क्यों है मानव संबंधों के तलतम  में, यह भूकंपी […]
लाख समझाने पर भी नहीं समझता आईना मेरा अंदर की टूटती नसें भी उकेर दीं बनाकर उसने दरकती लकीरें वो जो बैठे हैं गहरे दिल में मेरे आईना मेरा उन्हें भी हूबहू दिखाता है. कैसे छिपाऊँ दर्दे-दिल को सामने जब बैरी-मितवा हो ऐसा चुप हूँ मैं, चुप हैं वो, मंजर है खामोशी का यह कैसा. दिल की जिद है रग-रग में […]
समय चुप है अपनी निष्ठुरता लिए बदल रहा है निरंतर. तुम समय हो मेरे समय जिसने प्यार दिया अनंत डुबोकर किया एकाकार खुशियों से अमृत सुख की स्मृतियों से साँस साँस में चलती अनवरत सामीप्य की अव्यक्त अनुभूतियों से.     समय मेरा दूर असंबद्ध सा अबदर्शक सा बन बदल रहा है     सहारे तन के मन के     तुझसे जो बंधे थे अडिग अटूट  […]

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