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Wildlife

animal and plants

  1. Poem
From the cold lakes in SiberiaTo Manasarovar in Himalayas they glideGracefully curved neck, eyes calm and wiseMirroring milky white silence under the skies. In lowland freshwater wetlandsTo slow-moving rivers and streamsRich in aquatic vegetationIn reed-woven lands, swans dwell and feedApt keepers of balance in water and weedLifelong guild of mates, a faithful artA duo floating […]

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कीचड़ की कैद में थी झील की सोई हुई दृष्टि,अब नीलम-दर्पण बनकर जल ने पाई नव सृष्टि।कुमुदिनियों की अरुण हँसी बिखरी है लहरों पर,मानो उषा ने लिख दी हो कविता जल के अंतर। जहाँ जकड़े थे स्वप्न कभी दलदल की बेड़ियों में,वहीं आज जीवन गाता है हरीतिम छेड़ियों में।धुंधलाते क्षितिज से मुक्त हुआ अब यह […]

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कीचड़ की कैद में थी झील की सोई हुई दृष्टि,अब नीलम-दर्पण बनकर जल ने पाई नव सृष्टि।कुमुदिनियों की अरुण हँसी बिखरी है लहरों पर,मानो उषा ने लिख दी हो कविता जल के अंतर। जहाँ जकड़े थे स्वप्न कभी दलदल की बेड़ियों में,वहीं आज जीवन गाता है हरीतिम छेड़ियों में।धुंधलाते क्षितिज से मुक्त हुआ अब यह […]

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सूख चुके हैं प्रेमपात्र सब, मदिरा की गागर दे दो भूल चुका हूँ कौन कौन है, विस्मृति का आश्रय दे दो. ईश्वर सबकुछ भूल गया है, कृष्ण नही अब रथ पर हैंसत्य-प्रेम की राहों पर हम, फिर भी काँटे पथ पर हैं. जीवन बंधा-बंधा सा क्यों है, हाहाकार मचा यह क्यों है मानव संबंधों के तलतम  में, यह भूकंपी […]
लाख समझाने पर भी नहीं समझता आईना मेरा अंदर की टूटती नसें भी उकेर दीं बनाकर उसने दरकती लकीरें वो जो बैठे हैं गहरे दिल में मेरे आईना मेरा उन्हें भी हूबहू दिखाता है. कैसे छिपाऊँ दर्दे-दिल को सामने जब बैरी-मितवा हो ऐसा चुप हूँ मैं, चुप हैं वो, मंजर है खामोशी का यह कैसा. दिल की जिद है रग-रग में […]
समय चुप है अपनी निष्ठुरता लिए बदल रहा है निरंतर. तुम समय हो मेरे समय जिसने प्यार दिया अनंत डुबोकर किया एकाकार खुशियों से अमृत सुख की स्मृतियों से साँस साँस में चलती अनवरत सामीप्य की अव्यक्त अनुभूतियों से.     समय मेरा दूर असंबद्ध सा अबदर्शक सा बन बदल रहा है     सहारे तन के मन के     तुझसे जो बंधे थे अडिग अटूट  […]

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