My Humming Word

Month: August 2026

  1. Poem
हर कदम पर जो साथ दे, निस्वार्थ जिसका प्यार हो,सच्ची जुबान, साफ़ दिल और एतबार का आधार हो।हमारे राज़ जो दिल में छुपा ले, चट्टान सी ढाल बने,राह भटके जब कदम, तो सही मार्ग की मशाल बने। ​सहनशीलता का भाव हो, और क्षमा करने की समझ,मित्रता जो विश्वास की नींव पर हो, हर घड़ी, हर […]

Good Reads

Misconception and Misunderstandings – I In part XLVIII – Prodding Questions Faced by Hindus Globally – of this series, the author had addressed some common misconceptions and prodding questions that Hindus are often faced with globally from the people of other faiths, and particularly from those pursuing two dominant Abrahamic religions in the world. Then […]
“कोशा” की समीक्षा लिखते हुए, मैं प्रारंभ में ही यह उल्लेख करना चाहूँगा कि सेवानिवृत्ति के बाद से लेखक और मैं वर्षों से घनिष्ठ परिचित और मित्र रहे हैं, तथा एक लंबे समय से एक ही कॉलोनी में पास-पास रह रहे हैं। उस नाते, मैं दृढ़ विश्वास के साथ यह कह सकता हूँ कि यह […]

Worlwide

Misconception and Misunderstandings – I In part XLVIII – Prodding Questions Faced by Hindus Globally – of this series, the author had addressed some common misconceptions and prodding questions that Hindus are often faced with globally from the people of other faiths, and particularly from those pursuing two dominant Abrahamic religions in the world. Then […]
“कोशा” की समीक्षा लिखते हुए, मैं प्रारंभ में ही यह उल्लेख करना चाहूँगा कि सेवानिवृत्ति के बाद से लेखक और मैं वर्षों से घनिष्ठ परिचित और मित्र रहे हैं, तथा एक लंबे समय से एक ही कॉलोनी में पास-पास रह रहे हैं। उस नाते, मैं दृढ़ विश्वास के साथ यह कह सकता हूँ कि यह […]

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सूख चुके हैं प्रेमपात्र सब, मदिरा की गागर दे दो भूल चुका हूँ कौन कौन है, विस्मृति का आश्रय दे दो. ईश्वर सबकुछ भूल गया है, कृष्ण नही अब रथ पर हैंसत्य-प्रेम की राहों पर हम, फिर भी काँटे पथ पर हैं. जीवन बंधा-बंधा सा क्यों है, हाहाकार मचा यह क्यों है मानव संबंधों के तलतम  में, यह भूकंपी […]
लाख समझाने पर भी नहीं समझता आईना मेरा अंदर की टूटती नसें भी उकेर दीं बनाकर उसने दरकती लकीरें वो जो बैठे हैं गहरे दिल में मेरे आईना मेरा उन्हें भी हूबहू दिखाता है. कैसे छिपाऊँ दर्दे-दिल को सामने जब बैरी-मितवा हो ऐसा चुप हूँ मैं, चुप हैं वो, मंजर है खामोशी का यह कैसा. दिल की जिद है रग-रग में […]
समय चुप है अपनी निष्ठुरता लिए बदल रहा है निरंतर. तुम समय हो मेरे समय जिसने प्यार दिया अनंत डुबोकर किया एकाकार खुशियों से अमृत सुख की स्मृतियों से साँस साँस में चलती अनवरत सामीप्य की अव्यक्त अनुभूतियों से.     समय मेरा दूर असंबद्ध सा अबदर्शक सा बन बदल रहा है     सहारे तन के मन के     तुझसे जो बंधे थे अडिग अटूट  […]

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