My Humming Word

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  1. Poem
सभी भारतीयों के लिए हो शाश्वत गणतंत्र। आज़ादी और भारतीयता की मंगल कामना।। एक ही मोक्ष मार्ग दिखता, भगतसिंह सी अमरता।वसुधैव कुटुंबकम् भाव, रग रग में रहे झलकता।। धर्म कर्म चर्म से परे रहे, समरसता पर अटलता।वचन पर ही मरता जीता, ध्रुव पलटे तो पलटता।। रग रग में है खूँ खौलता, तमाम करेंगे सब निकृष्टता।रहे […]
  1. Poem
 तुम चलो तो चलो तो तुम बिलकुल अकेले आधुनिक सभ्यता के पाठ से सीखी चतुर विद्या को छोड़कर निपट अकेले रिक्त-रिक्त से पूर्वाग्रहों को त्यागकर अपने सदृश्य जीव की संगना से दूर हट एकदम अकेले मृत मंजिलों-इमारतों में सड़ रहीं वर्जनाओं के बाहर तुम चलो तो.  एक निस्सीम आकाश है  नीलाभ, पारदर्शी  कल्पना के आखिरी छोर तक अबूझ  रहस्यमयी  जिज्ञासा को कुदेरता अनंत से […]
  1. Poem
शरद ऋतु तो अभी भी आती हैपर पतझढ़ में अब वह बात कहाँ  वह वैभव वह भव्यता नहीं दिखती जो बरसों पहले हुआ करती थीपेड़ों से झिलमिल झरती वह पत्तियाँ उनके लाल, पीले, नारंगी, सुरमई रंग. वसंत भी हर साल अब भी आता हैपर नवजीवन नव-उल्लास नहीं लातावैसी समृद्धि-सम्पन्नता अब नहीं दिखतीकोपलों और कलियों में […]
  1. Poem
Editor’s Choice The fall season still comes, butWithout the glory and splendorAs hitherto dwelled in yesteryearsA lackluster vegetation without shadeOf all so familiar hues and candour… The Springtide still comes, butFlora lacks usual plentiful affluenceScales and buds lack their prime youthFlowers too neither blossom nor displaySo familiar rainbow variegation anymore… Have the seasons suffered impasse, […]
  1. Poem
Editor’s Choice मत सियो तुम ओंठ अपने मौन को संवाद दे दो,सुन रहा हूँ गीत कोई आज ऐसा तुम सुना दो। है समय का यह तकाजा भूल जाओ आज हम को।पर कहाँ का न्याय है अपराध से बढ़कर सजा दो।फिर न कहना यह मेरे दिल की कभी ख्वाहिश न थी-गर जहर देना मुझे है तो […]
  1. Poem
For global warming there’s no eradication,There are only two measures for amelioration.First measure to resort to is mitigation,Where it’s not feasible, adopt adaptation.For LDCs, even daily food too is a desperation,As developing nations lack finance mobilization.COPs are tantamount to Sunday congregation, To make tall hollow rhetoric and proclamation.Developed countries indulge in procrastination,Their commitment & pledge is […]
  1. Poem
कुछ अपने थे जो छोड़ गयेकुछ अपने जो जाने वाले हैंहम किस-किस की खैर करें खुद हम भी उसी कतार में हैं  जो कल आए थे आज चलेजो अब आए हैं कल जाएंगेफिर कुछ ऐसे अपने भी तो हैं जो असमय-कुसमय छोड़ चले जब यह हालत इस जग की हैऔर जब जीवन इतना नश्वर हैहम क्योंकर इतनी […]
  1. Poem
स्वप्न भी आवश्यक हैं, जोदेते हैं पंख, गति और उड़ानहमारे आवेगों एवं संवेगों कोइच्छाओं और आकांक्षाओं कोऔर आज जब मैं पलटता हूँअतीत के पन्नों को, यादों को…लगता है मैं भी एक स्वप्नदृष्टा हूँ तो आज इस वर्ष की विदाईवेलाएवं नववर्ष के वंदन-अभिवादन के उत्साह एवं  समारोह  पर बसयही हार्दिक चिंतन और शुभेच्छा हैकि आपके सपनों को […]

Good Reads

​भोर हुई, मन दर्पण मानिंद निर्मल और शांत जगा,रात्रि की पूरी निद्रा से, हर कोना हर्षित व नया लगा;पर इस पावन सन्नाटे में, एकाएक ऐसी टीस उठी,एक तीखी कूक से, मानो जैसे अंतर्मन की शांति लुटी। ​देखा एक पपीहा अपनी विरह-वेदना फिर दोहराता है,जैसे एक सुलगता, अनसुलझा गीत नभ में बिखराता है;“पी कहाँ… पी कहाँ…” […]

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​भोर हुई, मन दर्पण मानिंद निर्मल और शांत जगा,रात्रि की पूरी निद्रा से, हर कोना हर्षित व नया लगा;पर इस पावन सन्नाटे में, एकाएक ऐसी टीस उठी,एक तीखी कूक से, मानो जैसे अंतर्मन की शांति लुटी। ​देखा एक पपीहा अपनी विरह-वेदना फिर दोहराता है,जैसे एक सुलगता, अनसुलझा गीत नभ में बिखराता है;“पी कहाँ… पी कहाँ…” […]

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Pilgrimage-I Nearly all communities and religions in the world attach significance to places which have some connection with any worldly or supernatural act(s) or event(s) of the divine (God) or His messenger(s); the birth, enlightenment or death of founder and saints; sites of the spiritual calling or awakening; supposedly a dwelling or living place of […]

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