लंबे अर्से से मैं था कुछ ठहर गया।
मां की नाद सुन कर मैं लहर गया।।
वो जहन में है भले ही पहर गया।
प्रेम अमृत से जैसे भर बहर गया।।
मां कृपा से मेरा सुधर दहर गया।
प्रेम जल से बुझ अग्नि कहर गया।।
क्या हुआ अगर बीता सहर गया।
वो घर में सदा उतर ईद शहर गया।।
घर में मां ज्योत सदा तम हर गया।
बन महल गया जो हो खंडहर गया।।
बहर = सागर, दहर = संसार, सहर = सवेरा, शहर = चांद, तम = अंधेरा
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