जीवन में अंधेरा है अंधेरा घना है
पर अब अंधेरे से डर नहीं लगता
किशोरावस्था की आहट से
जीवन के अब अंतिम पड़ाव तक
पहले भी अंधेरे से समागम हुआ था
कभी प्रकाश की चमक-दमक
फिर लम्बे अंधकार का साम्राज्य
एक नि:शेष जीवन बीता है
अंधेरों के बीच अंधेरे से जूझते हुए
पर कभी हार नहीं मानी…
हाँ क्षण भर के लिए
थोड़ी निराशा और अवसाद
तब जरूर हुआ है
जब अपनों से ही धक्का मिला
गहन अंधेरे में डूबने इतराने को
पर सोचता हूँ जब तक जीवन है
यह सब ऐसे ही चलता रहेगा
फिर किसी से शिकायत कैसी
अंधेरा जीने से डर कैसा…?
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