My Humming Word

Poem

  1. Poem
भोर होने से प्रथम ही टूटते हैं स्वप्न सारे।खो रहे हैं नील नभ में शब्द जैसे रात्रि तारे।पोंछ कर दृग बिंदुओं को सच को सीने में छुपाये-पतित को पावन बनाने में पराजित अश्रु खारे। अनछुई इस देह ने स्पर्श के जो जख्म खाये।तन बदन की वेदना को उर पिटारी में संजोये।देखती कातर नयन से जो […]
  1. Poem
प्रतिवर्ष दशानन दहन किया, मन के रावण का नाश नहीं,अगनित सीता अपहृत होती, निज मर्यादा का भास नहीं।हम एक जलाते दशकंधर, शत दशकंधर पैदा होते,करते जो दहन मन का रावण, हर गली में रावण न होते। इस शक्ति पर्व का हेतु है क्या, है ब्यर्थ दिखावे की शक्ती,निर्बल को संबल दे न सके, अन्याय से […]
  1. Poem
Editor’s Choice हाँ अब वह जीवन-मुक्त हैजीवन में ठुकराए गए का कोई अवसाद नहींउन असफलताओं पर अब कोई पश्चाताप नहींजीवन की खास सफलताओं या उपलब्धियों परभी कोई अभिमान, आनन्द अथवा उल्लास नहीं हाँ अब वह जीवन-मुक्त हैसांसारिक उपलब्धियों अथवा प्राप्ति हेतुअब वह कोई इच्छा या सपना नहीं पालतान तो है उसे भीड़ में अलग पहचान […]
  1. Poem
Editor’s Choice ये कैसी अंधेरी रात थी असह्य लंबे पहरों की नशीली सी,गहन बेसुध सा किया थाजिसके मोहतन्त्र ने. उनींदी की ऐसी जिंदगी के सफर में हम आशा-निराशा के अटूट क्रम मेंसहते रहे टूटते-जुडते भ्रम में निरंतर पीछा करते हुए से अर्धस्वप्न में  सुख-चैन, शांति समृद्धि सौहार्द की मरीचिका का. समय बेशकीमती निकलता गया अपनी रफ्तार में  और हम कहीं दूर भटक गए […]
  1. Poem
I am in love withThe life giving sunThe sublime moonThe star studded skyMighty rivers and fountainsArid deserts and mountainsPlateau, ravine and high seasLuxuriant green forestsBeautiful flowers and grassThe wild and wildernessBreeze and torrential rainsIn fact every creationOf the almighty Brahman*Visible and invisibleOn this green planetAnd the infinite cosmos… But in my solitudeIn a contemplative moodWhenever […]
  1. Poem
Today this was my fatherAnd patriarch of the familyTomorrow this will be meOthers will follow one by oneThe ultimate reality and fateOf deceptive & elusive world:Here every visible thing is Cyclic, transient and mortal… Many people are so oftenHubristic and narcissisticAbout material possessionsAnd outward appearancesWhen this body is perishable;If anything is tenable and trueThis is […]

Good Reads

​भोर हुई, मन दर्पण मानिंद निर्मल और शांत जगा,रात्रि की पूरी निद्रा से, हर कोना हर्षित व नया लगा;पर इस पावन सन्नाटे में, एकाएक ऐसी टीस उठी,एक तीखी कूक से, मानो जैसे अंतर्मन की शांति लुटी। ​देखा एक पपीहा अपनी विरह-वेदना फिर दोहराता है,जैसे एक सुलगता, अनसुलझा गीत नभ में बिखराता है;“पी कहाँ… पी कहाँ…” […]

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​भोर हुई, मन दर्पण मानिंद निर्मल और शांत जगा,रात्रि की पूरी निद्रा से, हर कोना हर्षित व नया लगा;पर इस पावन सन्नाटे में, एकाएक ऐसी टीस उठी,एक तीखी कूक से, मानो जैसे अंतर्मन की शांति लुटी। ​देखा एक पपीहा अपनी विरह-वेदना फिर दोहराता है,जैसे एक सुलगता, अनसुलझा गीत नभ में बिखराता है;“पी कहाँ… पी कहाँ…” […]

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