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Day: August 24, 2026

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Misconception and Misunderstandings – I In part XLVIII – Prodding Questions Faced by Hindus Globally – of this series, the author had addressed some common misconceptions and prodding questions that Hindus are often faced with globally from the people of other faiths, and particularly from those pursuing two dominant Abrahamic religions in the world. Then […]
“कोशा” की समीक्षा लिखते हुए, मैं प्रारंभ में ही यह उल्लेख करना चाहूँगा कि सेवानिवृत्ति के बाद से लेखक और मैं वर्षों से घनिष्ठ परिचित और मित्र रहे हैं, तथा एक लंबे समय से एक ही कॉलोनी में पास-पास रह रहे हैं। उस नाते, मैं दृढ़ विश्वास के साथ यह कह सकता हूँ कि यह […]

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Misconception and Misunderstandings – I In part XLVIII – Prodding Questions Faced by Hindus Globally – of this series, the author had addressed some common misconceptions and prodding questions that Hindus are often faced with globally from the people of other faiths, and particularly from those pursuing two dominant Abrahamic religions in the world. Then […]

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सूख चुके हैं प्रेमपात्र सब, मदिरा की गागर दे दो भूल चुका हूँ कौन कौन है, विस्मृति का आश्रय दे दो. ईश्वर सबकुछ भूल गया है, कृष्ण नही अब रथ पर हैंसत्य-प्रेम की राहों पर हम, फिर भी काँटे पथ पर हैं. जीवन बंधा-बंधा सा क्यों है, हाहाकार मचा यह क्यों है मानव संबंधों के तलतम  में, यह भूकंपी […]
लाख समझाने पर भी नहीं समझता आईना मेरा अंदर की टूटती नसें भी उकेर दीं बनाकर उसने दरकती लकीरें वो जो बैठे हैं गहरे दिल में मेरे आईना मेरा उन्हें भी हूबहू दिखाता है. कैसे छिपाऊँ दर्दे-दिल को सामने जब बैरी-मितवा हो ऐसा चुप हूँ मैं, चुप हैं वो, मंजर है खामोशी का यह कैसा. दिल की जिद है रग-रग में […]
समय चुप है अपनी निष्ठुरता लिए बदल रहा है निरंतर. तुम समय हो मेरे समय जिसने प्यार दिया अनंत डुबोकर किया एकाकार खुशियों से अमृत सुख की स्मृतियों से साँस साँस में चलती अनवरत सामीप्य की अव्यक्त अनुभूतियों से.     समय मेरा दूर असंबद्ध सा अबदर्शक सा बन बदल रहा है     सहारे तन के मन के     तुझसे जो बंधे थे अडिग अटूट  […]

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