Editor’s Pick
एक चिरंतन मौन की गूंज सुनी है कभी?
साँसें रुक जाती हैं, जीवन ठहर जाता है
एक शाश्वत, निर्विशेष प्रेम की महागाथा
नहीं, खुशी तो नहीं, गौरवपूर्ण अवश्य है।
हाँ, जीवनवृत्त कोई असाधारण नहीं था
ऐसा कुछ अद्भुत या अनूठा भी नहीं था
पर कोई आम दुनियावी भी नहीं रहा था
जो भी था देखें तो प्रचुर था बहुमूल्य था।
इस जिंदगी ने उन्हें सब कुछ तो बख्शा था
भिनसार हो, दोपहर की बेला हो या निशीथ
पर उदास संध्या उनका खुद का चुनाव था
तो फिर अब है दु:ख या पछतावा ही व्यर्थ
जीवनगाथा खुद लिखी, दास्तान वे खुद बने
तो जब तक साँस है, उनको खुद ही जीना है
किसी प्रज्ञावान ने कहा भी है, यदि प्यार था
तो वे कभी बस अच्छे दोस्त नहीं रह सकते।
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