समय और हालात, इंसान को
क्या से क्या बना देते हैं
और कहाँ से कहाँ पहुँचा देते हैं!
किसी का घोर पतन होता है
फिर वह इंसान से इंसानियत के
निम्नतम स्तर तक पहुँच सकता है…
तो किसी को यही कारक
ऊर्ध्वगामी दिशा दे जाते हैं,
जीवन में शिखर तक ले जाते हैं।
एक स्वार्थ और प्रतिशोध वश
राक्षसी प्रवृत्ति का शिकार होकर
समाज पर एक बोझ बन जाता है…
तो दूसरा स्वयं की हितचिंता
से मुक्त, एक स्थितप्रज्ञ व देवतुल्य
खुद को समाज को अर्पित कर देता है।
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