My Humming Word

Month: February 2023

  1. Poem
सभी भारतीयों के लिए हो शाश्वत गणतंत्र। आज़ादी और भारतीयता की मंगल कामना।। एक ही मोक्ष मार्ग दिखता, भगतसिंह सी अमरता।वसुधैव कुटुंबकम् भाव, रग रग में रहे झलकता।। धर्म कर्म चर्म से परे रहे, समरसता पर अटलता।वचन पर ही मरता जीता, ध्रुव पलटे तो पलटता।। रग रग में है खूँ खौलता, तमाम करेंगे सब निकृष्टता।रहे […]
  1. Poem
 तुम चलो तो चलो तो तुम बिलकुल अकेले आधुनिक सभ्यता के पाठ से सीखी चतुर विद्या को छोड़कर निपट अकेले रिक्त-रिक्त से पूर्वाग्रहों को त्यागकर अपने सदृश्य जीव की संगना से दूर हट एकदम अकेले मृत मंजिलों-इमारतों में सड़ रहीं वर्जनाओं के बाहर तुम चलो तो.  एक निस्सीम आकाश है  नीलाभ, पारदर्शी  कल्पना के आखिरी छोर तक अबूझ  रहस्यमयी  जिज्ञासा को कुदेरता अनंत से […]

Good Reads

From the cold lakes in SiberiaTo Manasarovar in Himalayas they glideGracefully curved neck, eyes calm and wiseMirroring milky white silence under the skies. In lowland freshwater wetlandsTo slow-moving rivers and streamsRich in aquatic vegetationIn reed-woven lands, swans dwell and feedApt keepers of balance in water and weedLifelong guild of mates, a faithful artA duo floating […]
विस्तृत, गहन अरण्य, चित्तीदार शिकारी दबे पाँव चलते हैंजुड़ाव उनके रक्त से नहीं, लोभ की दमघोंटू गंध से बंधे हैंपीली आँखों में धधकती भूख, जबड़ों में छिपा विश्वासघातजंगल के स्वर्ण-हृदय सम्राट पर धोखे से घात लगाते हैं। अकेला एक लोलुप, वन सम्राट की चाल नहीं तोड़ सकतापर क्रूर, उन्मादी समूह से बच निकलने का भी […]

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विस्तृत, गहन अरण्य, चित्तीदार शिकारी दबे पाँव चलते हैंजुड़ाव उनके रक्त से नहीं, लोभ की दमघोंटू गंध से बंधे हैंपीली आँखों में धधकती भूख, जबड़ों में छिपा विश्वासघातजंगल के स्वर्ण-हृदय सम्राट पर धोखे से घात लगाते हैं। अकेला एक लोलुप, वन सम्राट की चाल नहीं तोड़ सकतापर क्रूर, उन्मादी समूह से बच निकलने का भी […]

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प्रतिवर्ष दशानन दहन किया, मन के रावण का नाश नहीं,अगनित सीता अपहृत होती, निज मर्यादा का भास नहीं।हम एक जलाते दशकंधर, शत दशकंधर पैदा होते,करते जो दहन मन का रावण, हर गली में रावण न होते। इस शक्ति पर्व का हेतु है क्या, है ब्यर्थ दिखावे की शक्ती,निर्बल को संबल दे न सके, अन्याय से […]

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