My Humming Word

Year: 2022

  1. Article
Pilgrimage-I Nearly all communities and religions in the world attach significance to places which have some connection with any worldly or supernatural act(s) or event(s) of the divine (God) or His messenger(s); the birth, enlightenment or death of founder and saints; sites of the spiritual calling or awakening; supposedly a dwelling or living place of […]
  1. Poem
Editor’s Choice सहयोग परस्पर हो सबका सब को त्योहार मनाने दें।हर आँगन को आलोकित कर सबको उल्लास मनाने दें। इस तरह मनाएं दीप पर्व, अंतर का तम सब मिट जाये।अज्ञान मिटे अर्न्तमन का, जीवन का घन तम हट जाये।मावस की काली रजनी ज्यों, है तिमिर मोह का अभ्यंतर-सबको इस पावन दीप पर्व पर वैदिक यज्ञ […]
  1. Poem
दर्द संजोये रखना दिल में अधरों से कुछ मत कहना।हँस-हँस कर कितना कोई पूँछे सीने में भींचे रहना।कहने से हासिल क्या होगा इठलायेंगे सभी मगर-बांट न लेगा लेशमात्र कोई खुद को ही सब है सहना। रखना सदा छुपाए इसको अपनी पलकों के अंदर।चारों ओर हो तिमिर घनेेरा बिछे हुए कांटे पथ पर।घोर उदासी के बादल […]
  1. Poem
पावस की मधुरिम रातों में, प्रिय याद तुम्हारी आयी है,संस्मरण पुराने जो बिस्मृत, सब संग वो अपने लायी है।वो मधुर घड़ी, संबन्ध नये, मन वीणा की झंकार नवल,दो अनजानों का मधुर मिलन, एकात्म आत्मा का पावन। क्या भूलूॅं और क्या याद करूॅं, हर पृष्ठ अलौकिक है लगता,रातें लगतीं मधुचन्द्र सरिस, मधुमास सरिस हर दिन लगता।काया […]
  1. Poem
भोर होने से प्रथम ही टूटते हैं स्वप्न सारे।खो रहे हैं नील नभ में शब्द जैसे रात्रि तारे।पोंछ कर दृग बिंदुओं को सच को सीने में छुपाये-पतित को पावन बनाने में पराजित अश्रु खारे। अनछुई इस देह ने स्पर्श के जो जख्म खाये।तन बदन की वेदना को उर पिटारी में संजोये।देखती कातर नयन से जो […]
  1. Poem
प्रतिवर्ष दशानन दहन किया, मन के रावण का नाश नहीं,अगनित सीता अपहृत होती, निज मर्यादा का भास नहीं।हम एक जलाते दशकंधर, शत दशकंधर पैदा होते,करते जो दहन मन का रावण, हर गली में रावण न होते। इस शक्ति पर्व का हेतु है क्या, है ब्यर्थ दिखावे की शक्ती,निर्बल को संबल दे न सके, अन्याय से […]

Good Reads

From the cold lakes in SiberiaTo Manasarovar in Himalayas they glideGracefully curved neck, eyes calm and wiseMirroring milky white silence under the skies. In lowland freshwater wetlandsTo slow-moving rivers and streamsRich in aquatic vegetationIn reed-woven lands, swans dwell and feedApt keepers of balance in water and weedLifelong guild of mates, a faithful artA duo floating […]
विस्तृत, गहन अरण्य, चित्तीदार शिकारी दबे पाँव चलते हैंजुड़ाव उनके रक्त से नहीं, लोभ की दमघोंटू गंध से बंधे हैंपीली आँखों में धधकती भूख, जबड़ों में छिपा विश्वासघातजंगल के स्वर्ण-हृदय सम्राट पर धोखे से घात लगाते हैं। अकेला एक लोलुप, वन सम्राट की चाल नहीं तोड़ सकतापर क्रूर, उन्मादी समूह से बच निकलने का भी […]

Worlwide

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विस्तृत, गहन अरण्य, चित्तीदार शिकारी दबे पाँव चलते हैंजुड़ाव उनके रक्त से नहीं, लोभ की दमघोंटू गंध से बंधे हैंपीली आँखों में धधकती भूख, जबड़ों में छिपा विश्वासघातजंगल के स्वर्ण-हृदय सम्राट पर धोखे से घात लगाते हैं। अकेला एक लोलुप, वन सम्राट की चाल नहीं तोड़ सकतापर क्रूर, उन्मादी समूह से बच निकलने का भी […]

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सूख चुके हैं प्रेमपात्र सब, मदिरा की गागर दे दो भूल चुका हूँ कौन कौन है, विस्मृति का आश्रय दे दो. ईश्वर सबकुछ भूल गया है, कृष्ण नही अब रथ पर हैंसत्य-प्रेम की राहों पर हम, फिर भी काँटे पथ पर हैं. जीवन बंधा-बंधा सा क्यों है, हाहाकार मचा यह क्यों है मानव संबंधों के तलतम  में, यह भूकंपी […]
लाख समझाने पर भी नहीं समझता आईना मेरा अंदर की टूटती नसें भी उकेर दीं बनाकर उसने दरकती लकीरें वो जो बैठे हैं गहरे दिल में मेरे आईना मेरा उन्हें भी हूबहू दिखाता है. कैसे छिपाऊँ दर्दे-दिल को सामने जब बैरी-मितवा हो ऐसा चुप हूँ मैं, चुप हैं वो, मंजर है खामोशी का यह कैसा. दिल की जिद है रग-रग में […]
समय चुप है अपनी निष्ठुरता लिए बदल रहा है निरंतर. तुम समय हो मेरे समय जिसने प्यार दिया अनंत डुबोकर किया एकाकार खुशियों से अमृत सुख की स्मृतियों से साँस साँस में चलती अनवरत सामीप्य की अव्यक्त अनुभूतियों से.     समय मेरा दूर असंबद्ध सा अबदर्शक सा बन बदल रहा है     सहारे तन के मन के     तुझसे जो बंधे थे अडिग अटूट  […]

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