My Humming Word

Poem

  1. Poem
सुनो हमारे प्यारे प्यारे दास जी,अब कुछ नहीं बाकी खास जी,लिखने को हमारे अब है पास जी,सब शब्द हो गए इकदम खलास जी. किसी से कुछ नहीं बची है आस जी,नीचे है धरती ऊपर आकाश जी,अब आप फेंको कुछ प्रकाश जी, आभार हैं हमको अहसास जी. शब्द बिना कैसे हो बकवास भी,जमाना ने खोए होश हवास […]
  1. Poem
True love is not constrainedor bound by the contemporaryethos and laws of the society –The manmade dos and don’ts. Without expecting reciprocity,it’s selfless and unconditionalboundless, eternal and purebeyond the space, age and time. It doesn’t bind but liberates –A reason why it’s rated greatestexcelling over all other emotionsand attributes, only next to God  28,741 total views, […]
  1. Poem
“सुरता” कहे सुनो “वीरू” माता,आप है पहली गुरु, भाग्य विधाता ।।“सुरता” कहे मेरे दूसरे गुरु दाता,“गुणेश” जी रहे सबसे बड़े भ्राता ।। उम्र मेरी 5 हुई विधवा हुई माता।पिता कमी को भुला दिया भ्राता ।।खुद नहीं खाता पर, मुझे खिलाता ।ऐसे भाई जैसे, कहां जग दाता! रात दिन एक कर, खूब कमाता ।निक्कर कुर्ता आप, […]
  1. Poem
Editor’s Choice एक और खूबसूरत शाम ढलने को हैसूरज छितिज़ से नीचे कब का जा चुका हैझिलमिल करते तारे आकाश में आच्छादित हैंपर हृदय में तुम्हारी वापसी की आशा संजोयेतुम्हारी मात्र एक झलक की चाहत लिए मन अशांत और व्याकुल है. शरद ऋतु के आगाज के साथ-साथ अब मौसम भी करवट बदलने लगा हैहवा में ठंडक […]
  1. Poem
He is feisty, humorousAnd quick-witted everSo I asked him one dayTo describe it brieflyThe contrast of the loveIn its success and failure! Piquant and chucklesomeHe responded as follows – After failure in a love affairThe lover inevitably turns toPerpetual Poetry and ShayariTo recite and ordain MehfilsRoam around place to placeMapping hills, deserts and oceansTasting exotic […]

Good Reads

​भोर हुई, मन दर्पण मानिंद निर्मल और शांत जगा,रात्रि की पूरी निद्रा से, हर कोना हर्षित व नया लगा;पर इस पावन सन्नाटे में, एकाएक ऐसी टीस उठी,एक तीखी कूक से, मानो जैसे अंतर्मन की शांति लुटी। ​देखा एक पपीहा अपनी विरह-वेदना फिर दोहराता है,जैसे एक सुलगता, अनसुलझा गीत नभ में बिखराता है;“पी कहाँ… पी कहाँ…” […]

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​भोर हुई, मन दर्पण मानिंद निर्मल और शांत जगा,रात्रि की पूरी निद्रा से, हर कोना हर्षित व नया लगा;पर इस पावन सन्नाटे में, एकाएक ऐसी टीस उठी,एक तीखी कूक से, मानो जैसे अंतर्मन की शांति लुटी। ​देखा एक पपीहा अपनी विरह-वेदना फिर दोहराता है,जैसे एक सुलगता, अनसुलझा गीत नभ में बिखराता है;“पी कहाँ… पी कहाँ…” […]

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