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Day: October 20, 2026

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अब यह न तो अनुराग की आसक्ति है,न ही स्मृतियों को संजोए रखने की याचना,यह तो मात्र अनंत शून्य के पार तैरती हुई…एक निःशब्द, मूक मनोकामना है—सीमाओं के भूगोल में घिरी, एकअदृश्य, निश्छल चेतना का स्पंदन मात्र,जो समाज अथवा नैतिकता के दायरों,सीमाओं या मर्यादाओं को स्वीकार कर भीदिशाहीन गगन में पंख फैलाती है. ​कारण..!वर्षों पूर्व […]

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अब यह न तो अनुराग की आसक्ति है,न ही स्मृतियों को संजोए रखने की याचना,यह तो मात्र अनंत शून्य के पार तैरती हुई…एक निःशब्द, मूक मनोकामना है—सीमाओं के भूगोल में घिरी, एकअदृश्य, निश्छल चेतना का स्पंदन मात्र,जो समाज अथवा नैतिकता के दायरों,सीमाओं या मर्यादाओं को स्वीकार कर भीदिशाहीन गगन में पंख फैलाती है. ​कारण..!वर्षों पूर्व […]

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सूख चुके हैं प्रेमपात्र सब, मदिरा की गागर दे दो भूल चुका हूँ कौन कौन है, विस्मृति का आश्रय दे दो. ईश्वर सबकुछ भूल गया है, कृष्ण नही अब रथ पर हैंसत्य-प्रेम की राहों पर हम, फिर भी काँटे पथ पर हैं. जीवन बंधा-बंधा सा क्यों है, हाहाकार मचा यह क्यों है मानव संबंधों के तलतम  में, यह भूकंपी […]
लाख समझाने पर भी नहीं समझता आईना मेरा अंदर की टूटती नसें भी उकेर दीं बनाकर उसने दरकती लकीरें वो जो बैठे हैं गहरे दिल में मेरे आईना मेरा उन्हें भी हूबहू दिखाता है. कैसे छिपाऊँ दर्दे-दिल को सामने जब बैरी-मितवा हो ऐसा चुप हूँ मैं, चुप हैं वो, मंजर है खामोशी का यह कैसा. दिल की जिद है रग-रग में […]
समय चुप है अपनी निष्ठुरता लिए बदल रहा है निरंतर. तुम समय हो मेरे समय जिसने प्यार दिया अनंत डुबोकर किया एकाकार खुशियों से अमृत सुख की स्मृतियों से साँस साँस में चलती अनवरत सामीप्य की अव्यक्त अनुभूतियों से.     समय मेरा दूर असंबद्ध सा अबदर्शक सा बन बदल रहा है     सहारे तन के मन के     तुझसे जो बंधे थे अडिग अटूट  […]

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