Editor’s Pick
जीवन की सबसे दुखद घटना थी
अपने प्यार और दोस्ती को खो देना
लेकिन जैसे जैसे समय बीतता गया
प्यार एक अमूर्त बनकर रह गया
मैंने दोस्ती को भी फीका पड़ते देखा
अब मैने अपने अंदर ही एक दोस्त पाया
मेरा अपना एकांत!
सच है, मुझे अकेले रहना पसंद है
क्योंकि मुझे कभी ऐसा साथी नहीं मिला
जो मेरा इतना साथ दे पाए
जितना मेरा अपना एकांत।
जब नियति ने सारे सपने छीन लिए
जीवन में सब कुछ उल्टा पुल्टा कर दिया
हृदय और मन की शांति के लिए
कोई नहीं था, अगर कुछ था
तो केवल मेरा अपना एकांत।
जैसे कि यह प्रारब्ध का हिस्सा है
यह मुझे कभी अकेला नहीं छोड़ता
एक सच्चा दोस्त, साथी और प्यार…
लेकिन कभी-कभी यह भी
एक अलग मुखौटा पहन लेता है
मेरे साथ क्रूर खेल खेलने की खातिर
फिर तो यह लंबे समय तक टिकता है
अपना नाम भी बदल लेता है
फिर एक असहनीय दर्द देने के लिए
यह एकांत से अकेलापन बन जाता है।
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