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Musings

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  1. Poem
Editor’s Choice When cheerful folks exclaim ‘Holi Hai!’It triggers out an upsurge of emotionsA rainbow splash of fascinating coloursSwinging, vacillating and dancing folksBody drenched in wet and dry coloursExchanging & sharing sweets and giftsWittingly cracking laughter and smilesIn an ambience of fun & frolic for hours… Also, the very surroundings have souls –Cool, composed like […]
  1. Poem
अपने से जो लोग है वो तो करते नहीं कभी कोई बात मुलाकात।दिन में कोई देख न ले, रात आती है लोगों को सुलाने के बाद।। धीरे धीरे चुपके चुपके आती है पास, तन्हा अकेले में रात।चांद रखता है पहरा उसके, आती है उसके ढलने उपरान्त।। राज दुलारी है पर दासियों को भी, लाती न […]

Good Reads

जीवन में सबसे दुखद बातें थीपहले प्यार, इसके बाद दोस्ती खोनालेकिन फिर गुजरते समय के साथप्यार एक अमूर्त भावना बनकर रह गयामैंने दोस्ती को भी फीका पड़ते देखाऔर अंतर्मन में ही पाया एक दोस्त –मेरा खुद का एकांत। सच है, मुझे एकान्त बहुत प्रिय हैक्योंकि मुझे कभी ऐसा मीत नहीं मिलाजो मेरा इतना साथ दे […]
Editor’s Pick एक चिरंतन मौन की गूंज सुनी है कभी?साँसें रुक जाती हैं, जीवन ठहर जाता हैएक शाश्वत, निर्विशेष प्रेम की महागाथानहीं, खुशी तो नहीं, गौरवपूर्ण अवश्य है। हाँ, जीवनवृत्त कोई असाधारण नहीं थाऐसा कुछ अद्भुत या अनूठा भी नहीं थापर कोई आम दुनियावी भी नहीं रहा थाजो भी था देखें तो प्रचुर था बहुमूल्य […]

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जीवन में सबसे दुखद बातें थीपहले प्यार, इसके बाद दोस्ती खोनालेकिन फिर गुजरते समय के साथप्यार एक अमूर्त भावना बनकर रह गयामैंने दोस्ती को भी फीका पड़ते देखाऔर अंतर्मन में ही पाया एक दोस्त –मेरा खुद का एकांत। सच है, मुझे एकान्त बहुत प्रिय हैक्योंकि मुझे कभी ऐसा मीत नहीं मिलाजो मेरा इतना साथ दे […]

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सूख चुके हैं प्रेमपात्र सब, मदिरा की गागर दे दो भूल चुका हूँ कौन कौन है, विस्मृति का आश्रय दे दो. ईश्वर सबकुछ भूल गया है, कृष्ण नही अब रथ पर हैंसत्य-प्रेम की राहों पर हम, फिर भी काँटे पथ पर हैं. जीवन बंधा-बंधा सा क्यों है, हाहाकार मचा यह क्यों है मानव संबंधों के तलतम  में, यह भूकंपी […]
लाख समझाने पर भी नहीं समझता आईना मेरा अंदर की टूटती नसें भी उकेर दीं बनाकर उसने दरकती लकीरें वो जो बैठे हैं गहरे दिल में मेरे आईना मेरा उन्हें भी हूबहू दिखाता है. कैसे छिपाऊँ दर्दे-दिल को सामने जब बैरी-मितवा हो ऐसा चुप हूँ मैं, चुप हैं वो, मंजर है खामोशी का यह कैसा. दिल की जिद है रग-रग में […]
समय चुप है अपनी निष्ठुरता लिए बदल रहा है निरंतर. तुम समय हो मेरे समय जिसने प्यार दिया अनंत डुबोकर किया एकाकार खुशियों से अमृत सुख की स्मृतियों से साँस साँस में चलती अनवरत सामीप्य की अव्यक्त अनुभूतियों से.     समय मेरा दूर असंबद्ध सा अबदर्शक सा बन बदल रहा है     सहारे तन के मन के     तुझसे जो बंधे थे अडिग अटूट  […]

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