My Humming Word

Humour

  1. Poem
उठो मित्र अब मोबाइल उठा लो,फिर थोड़ा तुम आनन्दित हो लो। बीत गई रात, अब यह नई सुबह है,पर हमको इस सबसे क्या लेना-देना। झट फेसबुक और व्हाट्सऐप खोलो,व जीवन का यह चरम सुख ले लो। ढेरों तो अग्रसारित संदेश हैं लम्बित,रोचक मीम्स और चलचित्र जमा हैं। भूल जाओ कि चिड़ियाँ चहकीं, अथवाफिर कमल खिले, […]
  1. Poem
Some of my long time friendsFeel elevated in calling selfAs avid “recycled teenagers”Arguing age is just a number…They feel cheery to announceLet’s eat, drink and make merryDon’t worry about getting old,Instead worry only thinking old. But I wonder if that be trueThen contrasting to teenagersWhy do they so often look forA dentist, physician or specialistTo […]
  1. Article
एक कहावत है – हाथी के दाॅंत ं ं ं खाने के और दिखाने के और। इसकी शुरूआत कब हुई कह नहीं सकता ं ं ं शायद इसका इतिहास भी मनु-शतरूपा के वंशजों जितना पुराना ही हो। ं ं ं किन्तु इसमें संदेह नहीं है कि इसकी ‘जेनिसिस’ उन महानुभावों को मद्देनजर रखकर ही हुई […]

Good Reads

​एक पुरानी हिंदी कहावत है “जिसकी लाठी उसकी भैंस“, जिसका शाब्दिक अर्थ है कि जिसके हाथ में लाठी होती है, भैंस उसी की होती है। सार रूप में, यह दर्शाता है कि जिसके पास धन और संसाधनों को नियंत्रित करने की शक्ति, ताकत या प्रभाव होता है, वह साधनों के न्याय या निष्पक्षता की परवाह […]
Editor’s Pick Holi’s magic, colours splash, joy unfurlsVibrant hues dance in the airGulal on cheeks with smiles aboundColourful festivity carries joy aroundThe earth itself wears rainbow robesSpring’s bloom in vermilion smiles. As if folks chase the fleeing noonPalms stained pink and sapphire blueKin & allies embrace in amber cloudsVintage wrongs dissolve from viewThe air tastes […]

Worlwide

​एक पुरानी हिंदी कहावत है “जिसकी लाठी उसकी भैंस“, जिसका शाब्दिक अर्थ है कि जिसके हाथ में लाठी होती है, भैंस उसी की होती है। सार रूप में, यह दर्शाता है कि जिसके पास धन और संसाधनों को नियंत्रित करने की शक्ति, ताकत या प्रभाव होता है, वह साधनों के न्याय या निष्पक्षता की परवाह […]
Editor’s Pick Holi’s magic, colours splash, joy unfurlsVibrant hues dance in the airGulal on cheeks with smiles aboundColourful festivity carries joy aroundThe earth itself wears rainbow robesSpring’s bloom in vermilion smiles. As if folks chase the fleeing noonPalms stained pink and sapphire blueKin & allies embrace in amber cloudsVintage wrongs dissolve from viewThe air tastes […]

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सूख चुके हैं प्रेमपात्र सब, मदिरा की गागर दे दो भूल चुका हूँ कौन कौन है, विस्मृति का आश्रय दे दो. ईश्वर सबकुछ भूल गया है, कृष्ण नही अब रथ पर हैंसत्य-प्रेम की राहों पर हम, फिर भी काँटे पथ पर हैं. जीवन बंधा-बंधा सा क्यों है, हाहाकार मचा यह क्यों है मानव संबंधों के तलतम  में, यह भूकंपी […]
लाख समझाने पर भी नहीं समझता आईना मेरा अंदर की टूटती नसें भी उकेर दीं बनाकर उसने दरकती लकीरें वो जो बैठे हैं गहरे दिल में मेरे आईना मेरा उन्हें भी हूबहू दिखाता है. कैसे छिपाऊँ दर्दे-दिल को सामने जब बैरी-मितवा हो ऐसा चुप हूँ मैं, चुप हैं वो, मंजर है खामोशी का यह कैसा. दिल की जिद है रग-रग में […]
समय चुप है अपनी निष्ठुरता लिए बदल रहा है निरंतर. तुम समय हो मेरे समय जिसने प्यार दिया अनंत डुबोकर किया एकाकार खुशियों से अमृत सुख की स्मृतियों से साँस साँस में चलती अनवरत सामीप्य की अव्यक्त अनुभूतियों से.     समय मेरा दूर असंबद्ध सा अबदर्शक सा बन बदल रहा है     सहारे तन के मन के     तुझसे जो बंधे थे अडिग अटूट  […]

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