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अराजकता मात्र एक राजनैतिक दर्शन ही नहींबल्कि एक बिगड़ी सामाजिक संस्कृति भी हैजिससे उन्मादित-ग्रसित एक अराजक इंसान हठधर्मी के साथ हावी होने में रहता है संलग्न। यह आदमी अपने विद्रोही व्यक्तित्व के कारणकरता फिरता है हरकतें बचकानी और विलक्षण व्यक्तिपरक, बगावती, छिद्रान्वेषी व अहंकारी तेवरफिर परस्पर अतिछादी तर्क व जुनून जैसे अवगुण। यह आदमी अकसर रहता है आत्ममुग्ध, […]
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एक अति प्रतिक्रियावादी रहता हैप्राय: भ्रमित, क्षुभित और क्रोधित अपने परिवेश में अपने प्रतिवेश में…उसकी नकारात्मकता, और फिर फलस्वरूप अत्यधिक आक्रामकताबदल देती है उसे एक विवेकशून्यस्वार्थी, घमंडी और परपीड़क इंसान रूपी ढोर में। फिर समय के साथ यह इंसानखो देता है खुद की पहचान –गरिमा, साख, विश्वसनीयताऔर स्वीकार्यता, या फिर यूँ कहें –प्रेम एवं सानिध्य अपने समाज मेंरह […]
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Editor’s Choice Though it’s more of a political philosophyBut the anarchism, as a matter-of-factly,Is corelated in all socio-political situationEngaging excessive control and coercion. In an individual with a rebellious personaDriven by his antics of freedom, rebellion,Individuality, criticism, pride, justice, et al;Reason and passion overlap each other. Person is narcissistic, reckless, incorrigibleSwindling, impenitent, callous, liar & […]

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सनातन धर्म: अस्तित्व-संरक्षण के अद्भुत तत्व ​पुरानी और नई दुनिया के कई अन्य संस्कृतियों और धर्मों के विपरीत, हिंदू धर्म (प्राचीन नाम सनातन धर्म) की उत्पत्ति किसी हठधर्मिता (dogma), घटना, पैगंबर या पैगंबरों के समूह से नहीं जुड़ी थी। यह दक्षिण एशिया के एक बड़े भौगोलिक क्षेत्र में समय के साथ जीवन जीने के एक […]
The present conflict involving the United States-Israel on one side and Iran on the other is, undoubtedly, a systemic threat to world peace primarily through its potential for an uncontrollable regional conflict and destruction, besides the collapse of global energy security and supply chain. This war started with the joint launch of the “Operation Epic […]

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सूख चुके हैं प्रेमपात्र सब, मदिरा की गागर दे दो भूल चुका हूँ कौन कौन है, विस्मृति का आश्रय दे दो. ईश्वर सबकुछ भूल गया है, कृष्ण नही अब रथ पर हैंसत्य-प्रेम की राहों पर हम, फिर भी काँटे पथ पर हैं. जीवन बंधा-बंधा सा क्यों है, हाहाकार मचा यह क्यों है मानव संबंधों के तलतम  में, यह भूकंपी […]
लाख समझाने पर भी नहीं समझता आईना मेरा अंदर की टूटती नसें भी उकेर दीं बनाकर उसने दरकती लकीरें वो जो बैठे हैं गहरे दिल में मेरे आईना मेरा उन्हें भी हूबहू दिखाता है. कैसे छिपाऊँ दर्दे-दिल को सामने जब बैरी-मितवा हो ऐसा चुप हूँ मैं, चुप हैं वो, मंजर है खामोशी का यह कैसा. दिल की जिद है रग-रग में […]
समय चुप है अपनी निष्ठुरता लिए बदल रहा है निरंतर. तुम समय हो मेरे समय जिसने प्यार दिया अनंत डुबोकर किया एकाकार खुशियों से अमृत सुख की स्मृतियों से साँस साँस में चलती अनवरत सामीप्य की अव्यक्त अनुभूतियों से.     समय मेरा दूर असंबद्ध सा अबदर्शक सा बन बदल रहा है     सहारे तन के मन के     तुझसे जो बंधे थे अडिग अटूट  […]

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