My Humming Word

Poem

  1. Poem
Once a wise man said –Sceptics don’t ever contribute,Cynics don’t ever createAnd doubters don’t ever achieveIt’s due to –Their negative upbringing               At the home,               In the school               And surroundings. On the contraryA person with positive attitudeCreates wondersIn respective arenaIn achieving targets and goalsBesides self acceptability                At the home,                In the organization                And society at large. […]
  1. Poem
तुम मुझसे इतनी दूरआकाश गंगा के दो छोरभावनाओं के इन्द्रधनुषी रंगों के बीचसीप में मोती जैसे, फूल में सुगन्ध सीमीत, घने काले मेघों के बीच बिजली सीतुम मेरे मन में बसी हो. तुम थी, मैं था, सपने थेतुम न रही, मैं न रहा, सपने टूटेफिर भी बार बार, सपने बुनता हूँ, सपने जीता हूँ,शायद भरने […]
  1. Poem
आदम और हव्‍वा, आज भी प्रासंगिक है,क्योंकि जिसे विद्वेष है ईश्वर सेऔर उसकी बनायी हर रचना से,जिसने फुसलाया प्रथम पुरुष – प्रथम नारी को,वह शैतान ‘विषधर’ कई रुपों मेंधरती पर आज भी जिंदा है. कभी वह बनता है साम्प्रदायिकता का दानवललचाता है फुसलाता है आदमी कोखाने को निषिद्ध फल –‘बाबरी मस्ज़िद’, ‘राम जन्मभूमि’, ‘कश्मीर’कभी भाषा, […]
  1. Poem
जब तुम थेमेरे आस पास जीवन मेंखुशी थी, सुख था, रंग थेजैसे हो कोई इंद्रधनुषस्थायी जीवन में॰ आज भी याद है मुझेतुम्हारे रोज बदलते परिधानवो गुलाबी और नीले रंगबन गए थे मेरे भी पसंदीदाबस जाने अंजाने में॰ फिर एक दिनतुम छोड़ गए मुझेसाथ ले गए सारे रंग भीकुछ भी न बचा इस जीवनऔर व्याकुल मन […]

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अनादि काल से दुनिया भर के विद्वानों, दार्शनिकों और धार्मिक गुरुओं ने विभिन्न संस्कृतियों और धर्मों में अलग-अलग नामों और रूपों में ईश्वर की प्रकृति और गुणों की व्याख्या और वर्णन किया है। वास्तव में, आधुनिक युग में दो अब्राहमिक (Abrahamic) धर्मों के विद्वानों और अनुयायियों ने तो आक्रामक रूप से अक्सर यह दावा, और […]

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अनादि काल से दुनिया भर के विद्वानों, दार्शनिकों और धार्मिक गुरुओं ने विभिन्न संस्कृतियों और धर्मों में अलग-अलग नामों और रूपों में ईश्वर की प्रकृति और गुणों की व्याख्या और वर्णन किया है। वास्तव में, आधुनिक युग में दो अब्राहमिक (Abrahamic) धर्मों के विद्वानों और अनुयायियों ने तो आक्रामक रूप से अक्सर यह दावा, और […]

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सूख चुके हैं प्रेमपात्र सब, मदिरा की गागर दे दो भूल चुका हूँ कौन कौन है, विस्मृति का आश्रय दे दो. ईश्वर सबकुछ भूल गया है, कृष्ण नही अब रथ पर हैंसत्य-प्रेम की राहों पर हम, फिर भी काँटे पथ पर हैं. जीवन बंधा-बंधा सा क्यों है, हाहाकार मचा यह क्यों है मानव संबंधों के तलतम  में, यह भूकंपी […]
लाख समझाने पर भी नहीं समझता आईना मेरा अंदर की टूटती नसें भी उकेर दीं बनाकर उसने दरकती लकीरें वो जो बैठे हैं गहरे दिल में मेरे आईना मेरा उन्हें भी हूबहू दिखाता है. कैसे छिपाऊँ दर्दे-दिल को सामने जब बैरी-मितवा हो ऐसा चुप हूँ मैं, चुप हैं वो, मंजर है खामोशी का यह कैसा. दिल की जिद है रग-रग में […]
समय चुप है अपनी निष्ठुरता लिए बदल रहा है निरंतर. तुम समय हो मेरे समय जिसने प्यार दिया अनंत डुबोकर किया एकाकार खुशियों से अमृत सुख की स्मृतियों से साँस साँस में चलती अनवरत सामीप्य की अव्यक्त अनुभूतियों से.     समय मेरा दूर असंबद्ध सा अबदर्शक सा बन बदल रहा है     सहारे तन के मन के     तुझसे जो बंधे थे अडिग अटूट  […]

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