My Humming Word

Year: 2026

  1. Poem
Editor’s Pick एक चिरंतन मौन की गूंज सुनी है कभी?साँसें रुक जाती हैं, जीवन ठहर जाता हैएक शाश्वत, निर्विशेष प्रेम की महागाथानहीं, खुशी तो नहीं, गौरवपूर्ण अवश्य है। हाँ, जीवनवृत्त कोई असाधारण नहीं थाऐसा कुछ अद्भुत या अनूठा भी नहीं थापर कोई आम दुनियावी भी नहीं रहा थाजो भी था देखें तो प्रचुर था बहुमूल्य […]
  1. Poem
Editor’s Pick Ever listened to a whisper of silence?With the breath paused, life standstillEpic narrative of a legendary romanceNo, it’s not gleeful, still it’s graceful. Life didn’t stay extraordinaryLife wasn’t any unique marvel evenBut it didn’t occur run-of-the-mill eitherWhatever came in balance was bountiful. It was within latitude during lifeBe it the dawn, midnoon or […]
  1. Poem
दिव्य आभा मानिंद है, यह सृष्टि का सुन्दर रूपयह दर्पण भी है, मानव की विवेकानुभूति अनूपघड़ी के बारह बजे, खुलते कितने ही पृष्ठ सफेदमानों क्षितिज पर हैं भविष्य की गाथा रचते छन्द. पुराना वर्ष थम गया, आधी रात के कोलाहल मेंनये का आगमन हुआ, प्रकाश की प्रथम पुंज मेंदिनों की एक कोमल डोर, बीते समय […]

Good Reads

अब यह न तो अनुराग की आसक्ति है,न ही स्मृतियों को संजोए रखने की याचना,यह तो मात्र अनंत शून्य के पार तैरती हुई…एक निःशब्द, मूक मनोकामना है—सीमाओं के भूगोल में घिरी, एकअदृश्य, निश्छल चेतना का स्पंदन मात्र,जो समाज अथवा नैतिकता के दायरों,सीमाओं या मर्यादाओं को स्वीकार कर भीदिशाहीन गगन में पंख फैलाती है. ​कारण..!वर्षों पूर्व […]

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अब यह न तो अनुराग की आसक्ति है,न ही स्मृतियों को संजोए रखने की याचना,यह तो मात्र अनंत शून्य के पार तैरती हुई…एक निःशब्द, मूक मनोकामना है—सीमाओं के भूगोल में घिरी, एकअदृश्य, निश्छल चेतना का स्पंदन मात्र,जो समाज अथवा नैतिकता के दायरों,सीमाओं या मर्यादाओं को स्वीकार कर भीदिशाहीन गगन में पंख फैलाती है. ​कारण..!वर्षों पूर्व […]

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सूख चुके हैं प्रेमपात्र सब, मदिरा की गागर दे दो भूल चुका हूँ कौन कौन है, विस्मृति का आश्रय दे दो. ईश्वर सबकुछ भूल गया है, कृष्ण नही अब रथ पर हैंसत्य-प्रेम की राहों पर हम, फिर भी काँटे पथ पर हैं. जीवन बंधा-बंधा सा क्यों है, हाहाकार मचा यह क्यों है मानव संबंधों के तलतम  में, यह भूकंपी […]
लाख समझाने पर भी नहीं समझता आईना मेरा अंदर की टूटती नसें भी उकेर दीं बनाकर उसने दरकती लकीरें वो जो बैठे हैं गहरे दिल में मेरे आईना मेरा उन्हें भी हूबहू दिखाता है. कैसे छिपाऊँ दर्दे-दिल को सामने जब बैरी-मितवा हो ऐसा चुप हूँ मैं, चुप हैं वो, मंजर है खामोशी का यह कैसा. दिल की जिद है रग-रग में […]
समय चुप है अपनी निष्ठुरता लिए बदल रहा है निरंतर. तुम समय हो मेरे समय जिसने प्यार दिया अनंत डुबोकर किया एकाकार खुशियों से अमृत सुख की स्मृतियों से साँस साँस में चलती अनवरत सामीप्य की अव्यक्त अनुभूतियों से.     समय मेरा दूर असंबद्ध सा अबदर्शक सा बन बदल रहा है     सहारे तन के मन के     तुझसे जो बंधे थे अडिग अटूट  […]

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