My Humming Word

जीवन में सबसे दुखद बातें थी
पहले प्यार, इसके बाद दोस्ती खोना
लेकिन फिर गुजरते समय के साथ
प्यार एक अमूर्त भावना बनकर रह गया
मैंने दोस्ती को भी फीका पड़ते देखा
और अंतर्मन में ही पाया एक दोस्त –
मेरा खुद का एकांत।

सच है, मुझे एकान्त बहुत प्रिय है
क्योंकि मुझे कभी ऐसा मीत नहीं मिला
जो मेरा इतना साथ दे सके
जितना मेरा खुद का एकांत।

जब नियति ने सारे सपने छीन लिए
एक दौर में सबकुछ उलट-पुलट हो गया
तो सांत्वना के लिए भी कोई नहीं था
अगर कुछ था तो मेरा खुद का एकांत।

मानों मेरे प्रारब्ध का हिस्सा हो
यह मुझे कभी एकाकी नहीं छोड़ता
एक सच्चा मित्र, सच्चा साथी और प्यार
तथापि कभी-कभी एक मास्क पहन लेता है
एक निष्ठुर खेल खेलने की खातिर।

अपने इस रूप में देर तक टिकता है
प्रत्युत्त अपना नाम भी बदल लेता है
और महज अकेलापन बन जाता है
फिर एक लम्बे अंतराल तक
असहनीय दर्द बनकर साथ जीने के लिए।

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