Editor’s Pick
जीवन के उन लंबे अनुभवों से
मैंने एक सार्वभौमिक सत्य जाना है
आप जीते हैं, आप परवाह करते हैं
और कई बार दिल और आत्मा से
आप किसी को प्यार करने लगते हैं।
पर हमेशा याद रखने लायक बात है…
आपको अपनी आत्मा पर कठोर
होने का कोई अधिकार नहीं है
अपने शरीर और मन पर ज्यादती
करने का कोई अधिकार नहीं है।
ब्रह्मांड में हर चीज जिसमें जीवन है
जो दिखाई अथवा सुनाई देती है
चाहे कितनी भी सुन्दर व सुखद हो
उसका समय के साथ क्षरण विहित है
और अंततः नष्ट होना भी निश्चित है।
सर्वशक्तिमान ईश्वरीय शक्ति ने
एक मानव आत्मा के साथ-साथ
आपको एक शरीर एवं मन दिया है
इनकी देखभाल करने, महसूस करने
और जीवन का आनंद लेने की खातिर।
ब्रह्मांड का एक और शाश्वत सत्य –
एवं जीवन की सत्यनिष्ठ मीमांसा भी…
एक दिन आत्मा को सब छोड़कर
सार्वभौमिक-आत्मा में विलीन होना है
तो अंदर और आसपास कुछ भी होता हो
शरीर और मन पर कभी भी कठोर न हों
जब तक आप जीते हैं, कारक कोई भी हो
फिर चाहे कितना भी प्रिय क्यों न हो!
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