My Humming Word

Life

  1. Poem
यह ना पूछो हमसे इस दुनिया मेंहमने क्या-क्या होते हुए देखा है! दोस्त अचानक दुश्मन बन जाते हैंऔर दुश्मन, दोस्त दिखने लगते हैंफिर दुश्मन के दुश्मन मिलकरदोस्ती का स्वांग करते नजर आते हैं। रिश्ते जब स्वार्थ पर आधारित होंइन आँखों पर पट्टी चढ़ जाती हैजीवन भर के संबंध, सच्चे हितैषी हानिकारक प्रतिद्वंदी नजर आते हैं। फीके, […]
  1. Poem
संपादक की पसंद तितली रानी, तितली रानीकरती फिरती हो मनमानीफूल-फूल मंडराती फिरतीपीछे अपनी छोड़ निशानी। खुद के रंगों और चंचलता सेतुम सबका मन हर लेती होऔर अपने छोटे से जीवन सेजीने की कला सिखलाती हो। लेकिन आज उदास इस तरहवीराने में आकर क्यों बैठी होक्या तुम हो बीमार या फिररूठ किसी से, यूँ ही ऐंठी […]
  1. Poem
संपादक की पसंद उसने मुझसे कहा दूसरों के लिए जीना अबबहुत हुआ, बहुत हो लियाअब वह केवल खुद के लिएखुद की खुशियों के लिए जीना चाहता है…! फिर शेष जीवनवह इस जुनून के साथ, खुशी की चाहत लिएखुशी की तलाश मेंएक अंधी दौड़ में शामिलएक लम्बी-अंधी सुरंग मेंजिसका न आदि है न अंतचलता रहा, दौड़ता रहा है…दौड़ आज भी […]

Good Reads

सत्य की ईंटों से, उसने भव्य मंदिर था रचा,छल-कपट के वेग से, जो सर्वदा रक्षित बचा;लोग जिसकी निष्ठा को नमन करते हर घड़ी,पर स्वयं के ही भाग्य से, प्रबल जंग है छिड़ी। बंधा रहा जो व्यक्ति सदा सत्य की मर्यादा से,अपराधी सिद्ध हुआ, एक प्रियजन के दुराव से;तमाम नतमस्तक हैं, जिसके अडिग चरित्र पर,हारा वह […]

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सत्य की ईंटों से, उसने भव्य मंदिर था रचा,छल-कपट के वेग से, जो सर्वदा रक्षित बचा;लोग जिसकी निष्ठा को नमन करते हर घड़ी,पर स्वयं के ही भाग्य से, प्रबल जंग है छिड़ी। बंधा रहा जो व्यक्ति सदा सत्य की मर्यादा से,अपराधी सिद्ध हुआ, एक प्रियजन के दुराव से;तमाम नतमस्तक हैं, जिसके अडिग चरित्र पर,हारा वह […]

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सूख चुके हैं प्रेमपात्र सब, मदिरा की गागर दे दो भूल चुका हूँ कौन कौन है, विस्मृति का आश्रय दे दो. ईश्वर सबकुछ भूल गया है, कृष्ण नही अब रथ पर हैंसत्य-प्रेम की राहों पर हम, फिर भी काँटे पथ पर हैं. जीवन बंधा-बंधा सा क्यों है, हाहाकार मचा यह क्यों है मानव संबंधों के तलतम  में, यह भूकंपी […]
लाख समझाने पर भी नहीं समझता आईना मेरा अंदर की टूटती नसें भी उकेर दीं बनाकर उसने दरकती लकीरें वो जो बैठे हैं गहरे दिल में मेरे आईना मेरा उन्हें भी हूबहू दिखाता है. कैसे छिपाऊँ दर्दे-दिल को सामने जब बैरी-मितवा हो ऐसा चुप हूँ मैं, चुप हैं वो, मंजर है खामोशी का यह कैसा. दिल की जिद है रग-रग में […]
समय चुप है अपनी निष्ठुरता लिए बदल रहा है निरंतर. तुम समय हो मेरे समय जिसने प्यार दिया अनंत डुबोकर किया एकाकार खुशियों से अमृत सुख की स्मृतियों से साँस साँस में चलती अनवरत सामीप्य की अव्यक्त अनुभूतियों से.     समय मेरा दूर असंबद्ध सा अबदर्शक सा बन बदल रहा है     सहारे तन के मन के     तुझसे जो बंधे थे अडिग अटूट  […]

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