My Humming Word

Life

  1. Poem
जब भी मैं खोलता हूँपुरानी यादों की किताब,प्रस्तावना में लिखा होता हैउस एक दिन, उसके बाद भीजीवन के एक दौर मेंमैंने आपके दिल और दिमागको गहरी चोट पहुँचाईआपको रोने पर मजबूर कियाऔर लंबे समय तक दुखी रखा… और उसके बाद केकितने ही अध्याय गायब हैं,कितने ही पन्ने फट गए हैं,लेकिन उपसंहार में बसमेरी एक ही […]
  1. Poem
मैं अक्सर सोचता रहता हूँक्या तुम भी कभी याद करते होहम कभी-कहीं मिले थे एक बारकुछ साझे पल और स्थान साक्षी हैं। तुम खुद तो आगे बढ़ गए थेपर कुछ स्मृतिचिह्न पीछे छोड़ गएवे अधूरे सपने और अधूरी इच्छाएँमैंने जीवन भर एक अंधे की तरह उनका पीछा किया। जीवन के इस बहीखाते मेंमेरे हिस्से में […]
  1. Poem
यह ना पूछो हमसे इस दुनिया मेंहमने क्या-क्या होते हुए देखा है! दोस्त अचानक दुश्मन बन जाते हैंऔर दुश्मन, दोस्त दिखने लगते हैंफिर दुश्मन के दुश्मन मिलकरदोस्ती का स्वांग करते नजर आते हैं। रिश्ते जब स्वार्थ पर आधारित होंइन आँखों पर पट्टी चढ़ जाती हैजीवन भर के संबंध, सच्चे हितैषी हानिकारक प्रतिद्वंदी नजर आते हैं। फीके, […]

Good Reads

डॉ. जयपाल सिंह यह कहानी कई सदियों पुरानी है। तत्कालीन बगदाद के एक छोटे से शहर में अलादीन नाम का एक सज्जन अपनी पत्नी, दो बच्चों और माता-पिता के साथ रहता था। वह बंदा इतना लापरवाह और आलसी था कि अधिकांश समय बेकार बैठा रहता था और अपनी पत्नी पर परिवार के लिए रोटी-रोजी कमाने […]

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सूख चुके हैं प्रेमपात्र सब, मदिरा की गागर दे दो भूल चुका हूँ कौन कौन है, विस्मृति का आश्रय दे दो. ईश्वर सबकुछ भूल गया है, कृष्ण नही अब रथ पर हैंसत्य-प्रेम की राहों पर हम, फिर भी काँटे पथ पर हैं. जीवन बंधा-बंधा सा क्यों है, हाहाकार मचा यह क्यों है मानव संबंधों के तलतम  में, यह भूकंपी […]
लाख समझाने पर भी नहीं समझता आईना मेरा अंदर की टूटती नसें भी उकेर दीं बनाकर उसने दरकती लकीरें वो जो बैठे हैं गहरे दिल में मेरे आईना मेरा उन्हें भी हूबहू दिखाता है. कैसे छिपाऊँ दर्दे-दिल को सामने जब बैरी-मितवा हो ऐसा चुप हूँ मैं, चुप हैं वो, मंजर है खामोशी का यह कैसा. दिल की जिद है रग-रग में […]
समय चुप है अपनी निष्ठुरता लिए बदल रहा है निरंतर. तुम समय हो मेरे समय जिसने प्यार दिया अनंत डुबोकर किया एकाकार खुशियों से अमृत सुख की स्मृतियों से साँस साँस में चलती अनवरत सामीप्य की अव्यक्त अनुभूतियों से.     समय मेरा दूर असंबद्ध सा अबदर्शक सा बन बदल रहा है     सहारे तन के मन के     तुझसे जो बंधे थे अडिग अटूट  […]

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