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  1. Poem
अपने संस्कारों व अर्जित ज्ञान के बल पर,देश व समाज में खुद का स्थान ही नहीं,अपितु उसने जीवन में कौशल भी सीखा;अपने प्रियजनों, रिश्तों और संबंधों को,जीवन भर के लिए, एक ईमानदारी सेसंभालना, सहेजना और पोषित करना।  परन्तु वह आजतक नहीं समझ पाया,उनको, जो एक गिरगिट की तरह अक्सर,खुद की सुविधा और माहौल के अनुसार,जल्दी-जल्दी […]
  1. Poem
बार बार इसके जिक्र से नाराज़ होती है खुद फ़ज़ा ।जो हो जाए चुपके चुपके उसके जैसा कहां मज़ा।। राम नाम का मचाया शोर, सांसों को कभी न भजा।पाखंडी के वो पल्ले पड़ी, राम रट पूरा कर रही जजा।। ज्यादा बकती जीभ को, घिसने की हैं मिली सज़ा।देख मन यही कहता, तूं कर कुछ पर […]
  1. Poem
A prominent yet frustrated memberOf the oldest political party in IndiaThat also incidentally carries the legacyOf playing crucial act in freedom struggleSets a new paradigm so scaling new lowsin dirty politics… When he so vehemently as also brazenlyDeclared arrogantly from the public forumCalling the Indian electorate as Rakshasas… You are all Rakshasas (demons); those whovote […]
  1. Poem
LifelongPeople chase temporal  objectsOf money and other physical goodsFor own hedonistic & sensual pleasureWith an endless quest and cravingNurturing this false notion and beliefThat they are real source of happiness… Alas! How unreal and mistaken they areB’coz true happiness never comes withMaterial possessions and sensory pleasuresIt’s a virtue – contentment, the SantoshaThat carries true and lasting […]

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सूख चुके हैं प्रेमपात्र सब, मदिरा की गागर दे दो भूल चुका हूँ कौन कौन है, विस्मृति का आश्रय दे दो. ईश्वर सबकुछ भूल गया है, कृष्ण नही अब रथ पर हैंसत्य-प्रेम की राहों पर हम, फिर भी काँटे पथ पर हैं. जीवन बंधा-बंधा सा क्यों है, हाहाकार मचा यह क्यों है मानव संबंधों के तलतम  में, यह भूकंपी […]
लाख समझाने पर भी नहीं समझता आईना मेरा अंदर की टूटती नसें भी उकेर दीं बनाकर उसने दरकती लकीरें वो जो बैठे हैं गहरे दिल में मेरे आईना मेरा उन्हें भी हूबहू दिखाता है. कैसे छिपाऊँ दर्दे-दिल को सामने जब बैरी-मितवा हो ऐसा चुप हूँ मैं, चुप हैं वो, मंजर है खामोशी का यह कैसा. दिल की जिद है रग-रग में […]
समय चुप है अपनी निष्ठुरता लिए बदल रहा है निरंतर. तुम समय हो मेरे समय जिसने प्यार दिया अनंत डुबोकर किया एकाकार खुशियों से अमृत सुख की स्मृतियों से साँस साँस में चलती अनवरत सामीप्य की अव्यक्त अनुभूतियों से.     समय मेरा दूर असंबद्ध सा अबदर्शक सा बन बदल रहा है     सहारे तन के मन के     तुझसे जो बंधे थे अडिग अटूट  […]

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