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Poem

  1. Poem
Editor’s Choice OnceHe had run awayFrom his lifeAnd discernible dutyPassing buck on destinyIn an act of cowardice… On realization,For his crimeHe didn’t waitFor a divine trialAnd punishment for..His misdemeanor or misdeed. InsteadHe listened to conscienceAnd punished himselfFor a life to liveA cursed and condemnedTill redemption is achieved! Image: Pixabay  37,100 total views,  26 views today

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अनादि काल से दुनिया भर के विद्वानों, दार्शनिकों और धार्मिक गुरुओं ने विभिन्न संस्कृतियों और धर्मों में अलग-अलग नामों और रूपों में ईश्वर की प्रकृति और गुणों की व्याख्या और वर्णन किया है। वास्तव में, आधुनिक युग में दो अब्राहमिक (Abrahamic) धर्मों के विद्वानों और अनुयायियों ने तो आक्रामक रूप से अक्सर यह दावा, और […]

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अनादि काल से दुनिया भर के विद्वानों, दार्शनिकों और धार्मिक गुरुओं ने विभिन्न संस्कृतियों और धर्मों में अलग-अलग नामों और रूपों में ईश्वर की प्रकृति और गुणों की व्याख्या और वर्णन किया है। वास्तव में, आधुनिक युग में दो अब्राहमिक (Abrahamic) धर्मों के विद्वानों और अनुयायियों ने तो आक्रामक रूप से अक्सर यह दावा, और […]

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प्रतिवर्ष दशानन दहन किया, मन के रावण का नाश नहीं,अगनित सीता अपहृत होती, निज मर्यादा का भास नहीं।हम एक जलाते दशकंधर, शत दशकंधर पैदा होते,करते जो दहन मन का रावण, हर गली में रावण न होते। इस शक्ति पर्व का हेतु है क्या, है ब्यर्थ दिखावे की शक्ती,निर्बल को संबल दे न सके, अन्याय से […]

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