My Humming Word

Month: February 2026

  1. Poem
Rajnigandha, night’s sultry whispererUnfolding like an endless esoteric prayerA green stalk, greenish buds and white petalsTo love’s velvety addiction, its fragrance unfurls. For many, it’s a bloom in night’s dark masqueradeBut for him, an egress to memories’ moonlit shadeA symbol of emotions wrapped tight in ivory petalsEchoes of love’s whispers in night’s euphoric surge. In […]
  1. Poem
Memories haunt him, like autumn’s stealthy creepWhispers in the nights of what way back did seepAlone in a shipwreck, he on nostalgia’s tidal waveShadows drowning in the blues like a lonely grave. Many faded photographs, letters like fallen leavesEchoes of bygone days, rustling what he believesHe keeps brooding in twilight, shadows intertwineDrowned in nostalgic labyrinth, […]

Good Reads

सनातन संस्कार (अनुष्ठान) विश्व की सभी विलुप्त और विद्यमान सभ्यताओं के बीच, जब सनातन धर्म के ताने-बाने की बात आती है, तो जीवन को कभी भी जैविक घटनाओं के एक यादृच्छिक अनुक्रम के रूप में नहीं देखा गया है; इसके बजाय, इसे आध्यात्मिक मुक्ति (मोक्ष) के अंतिम लक्ष्य के साथ चरणों में आत्मा की एक […]

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सनातन संस्कार (अनुष्ठान) विश्व की सभी विलुप्त और विद्यमान सभ्यताओं के बीच, जब सनातन धर्म के ताने-बाने की बात आती है, तो जीवन को कभी भी जैविक घटनाओं के एक यादृच्छिक अनुक्रम के रूप में नहीं देखा गया है; इसके बजाय, इसे आध्यात्मिक मुक्ति (मोक्ष) के अंतिम लक्ष्य के साथ चरणों में आत्मा की एक […]

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सूख चुके हैं प्रेमपात्र सब, मदिरा की गागर दे दो भूल चुका हूँ कौन कौन है, विस्मृति का आश्रय दे दो. ईश्वर सबकुछ भूल गया है, कृष्ण नही अब रथ पर हैंसत्य-प्रेम की राहों पर हम, फिर भी काँटे पथ पर हैं. जीवन बंधा-बंधा सा क्यों है, हाहाकार मचा यह क्यों है मानव संबंधों के तलतम  में, यह भूकंपी […]
लाख समझाने पर भी नहीं समझता आईना मेरा अंदर की टूटती नसें भी उकेर दीं बनाकर उसने दरकती लकीरें वो जो बैठे हैं गहरे दिल में मेरे आईना मेरा उन्हें भी हूबहू दिखाता है. कैसे छिपाऊँ दर्दे-दिल को सामने जब बैरी-मितवा हो ऐसा चुप हूँ मैं, चुप हैं वो, मंजर है खामोशी का यह कैसा. दिल की जिद है रग-रग में […]
समय चुप है अपनी निष्ठुरता लिए बदल रहा है निरंतर. तुम समय हो मेरे समय जिसने प्यार दिया अनंत डुबोकर किया एकाकार खुशियों से अमृत सुख की स्मृतियों से साँस साँस में चलती अनवरत सामीप्य की अव्यक्त अनुभूतियों से.     समय मेरा दूर असंबद्ध सा अबदर्शक सा बन बदल रहा है     सहारे तन के मन के     तुझसे जो बंधे थे अडिग अटूट  […]

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