My Humming Word

Month: January 2025

  1. Poem
सूर्यास्त का समय, सुनसान समुद्र तटजैसे बाल सुलभ जिज्ञासा से वह देखता रहादेशी ने झुककर गीली रेत से कुछ उठायाऔर फिर दूर उसे पानी में बहा दियादेशी को यही कारनामा बार-बार दोहराते देखउसका आश्चर्य और उत्सुकता स्वाभाविक थी। कुछ हैरानी वश ही उसने देशी` से पूछामुझे आश्चर्य है आखिर तुम कर क्या रहे हो?देशी का […]
  1. Poem
Editor’s Pick उन जटिल परिस्थितियों में कष्ट के बावजूदजब मैंने अपनी वेदना प्रकट नहीं होने दीतो इसका आशय यह कैसे निकलता हैकि मुझे दर्द का अहसास ही नहीं हुआ! जब तुम हमेशा के लिए जा रहे थेऔर मैंने अपने आँसू नहीं दिखाए थेतो इसका आशय यह कैसे निकलता हैकि तुम्हें खोकर मुझे रोना नहीं आया […]
  1. Poem
Editor’s Pick यह मात्र एक और हृदयग्राही धुन नहीं हैअपितु मेरे दिल और आत्मा की पुकार हैएक शाश्वत, निर्दोष और निर्मल प्रेम की। यह बस एक और वेदनापूर्ण क्रंदन नहीं हैबल्कि मेरी वास्तविक व्यथा का फ़साना हैजो फ़क़त आपकी विरक्ति से गहराया है। शायद आज इस खालीपन की अनुभूति न होपर किसी दिन आपको अहसास […]
  1. Poem
हर एक गोधूलि की शुरुआत,शरीर के साथ मेरा मन भीथका और बोझिल सा हो जाता हैफिर हताश मन तरसता रहता हैआपकी मधुर वाणी और निकाय के स्नेहिल और स्निग्ध स्पर्श सुखका एहसास एक बार फिर सेजीवन में पाने और जीने के लिए… मानो गहराती हुई रात कीनीरवता एवं स्तब्धता के बीचभयावह अग्नि की ज्वाला उठी […]
  1. Poem
The Makar Sankranti this yearIs more pious and singular event.One of the famous Hindu festivalsDedicated to the solar deity, Surya…Based on the planetary movementsIt’s an instance of transition of SunFrom zodiac Sagittarius to CapricornFrom the south to north hemisphereMarking onset of change in season.The occasion is widely celebratedBy various names in different partsAs new dawn […]
  1. Poem
A bit tiny yet marvellousShimmering white paniclesOf the Rajnigandha blooms…Their candidly sweet fragranceReminds few golden momentsThen my heart over againTurns distraught and restlessYearning those bygone days… During a span of timeLife was so fragrant withThe divine Rajnigandha touchSome sweet Rajnigandha feelingsAnd adorable Rajnigandha momentsInstead more apt to say…Rajnigandha memories and dreams. Like the fireflies glow […]
  1. Poem
घर के बाहर लान कीहरी-भरी मखमली घास परचमकीली गुनगुनी धूप मेंपसंदीदा आरामकुर्सी परदोनों आँखें बंद, चंचल मनकिसी की मधुर यादों में खोयावह चिंतन में तल्लीन है… शिशिर ऋतु के मौसम मेंसाल के इस सबसे ठंडे दिनजीवन के इस पड़ाव परकाश इस नर्म गुनगुनी धूप सेइतर ये दिन और ज्यादासुखद, सेहतमंद एवं सुंदरललित और मनभावन होते..! […]
  1. Poem
तुम्हारी सूरत और सीरत की कशिश थी,या फिर मेरी चाहत की शिद्दत का कमाल.एक व्यग्र हृदय एवं मन की उलझनों केचक्रव्यूह में उलझा मानों एक मकड़जाल. चाहे जितना तुमको भुलाने की कोशिश की,तुम हमेशा ही मुझको उतना ही याद आए.तुम्हारी यादों की परछाई संग चलते-चलते,देखो न आज हम कितनी दूर निकल आए. एक बेहद लम्बा […]

Good Reads

Editor’s Pick Holi’s magic, colours splash, joy unfurlsVibrant hues dance in the airGulal on cheeks with smiles aboundColourful festivity carries joy aroundThe earth itself wears rainbow robesSpring’s bloom in vermilion smiles. As if folks chase the fleeing noonPalms stained pink and sapphire blueKin & allies embrace in amber cloudsVintage wrongs dissolve from viewThe air tastes […]
​विभिन्न विधाओं के गद्य और पद्य पर लिखने की अपनी लंबी यात्रा में, इस लेखक ने शायद ही कभी सिनेमा को छुआ है, शायद सिर्फ एक या दो कविता(एँ) और भारतीय सिनेमा पर एक निबंध। परिवार और समाज सहित कई अन्य आनुवंशिक और पर्यावरणीय कारक यह निर्धारित करते हैं कि एक बच्चा शौक, गुणों और […]

Worlwide

Editor’s Pick Holi’s magic, colours splash, joy unfurlsVibrant hues dance in the airGulal on cheeks with smiles aboundColourful festivity carries joy aroundThe earth itself wears rainbow robesSpring’s bloom in vermilion smiles. As if folks chase the fleeing noonPalms stained pink and sapphire blueKin & allies embrace in amber cloudsVintage wrongs dissolve from viewThe air tastes […]

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सूख चुके हैं प्रेमपात्र सब, मदिरा की गागर दे दो भूल चुका हूँ कौन कौन है, विस्मृति का आश्रय दे दो. ईश्वर सबकुछ भूल गया है, कृष्ण नही अब रथ पर हैंसत्य-प्रेम की राहों पर हम, फिर भी काँटे पथ पर हैं. जीवन बंधा-बंधा सा क्यों है, हाहाकार मचा यह क्यों है मानव संबंधों के तलतम  में, यह भूकंपी […]
लाख समझाने पर भी नहीं समझता आईना मेरा अंदर की टूटती नसें भी उकेर दीं बनाकर उसने दरकती लकीरें वो जो बैठे हैं गहरे दिल में मेरे आईना मेरा उन्हें भी हूबहू दिखाता है. कैसे छिपाऊँ दर्दे-दिल को सामने जब बैरी-मितवा हो ऐसा चुप हूँ मैं, चुप हैं वो, मंजर है खामोशी का यह कैसा. दिल की जिद है रग-रग में […]
समय चुप है अपनी निष्ठुरता लिए बदल रहा है निरंतर. तुम समय हो मेरे समय जिसने प्यार दिया अनंत डुबोकर किया एकाकार खुशियों से अमृत सुख की स्मृतियों से साँस साँस में चलती अनवरत सामीप्य की अव्यक्त अनुभूतियों से.     समय मेरा दूर असंबद्ध सा अबदर्शक सा बन बदल रहा है     सहारे तन के मन के     तुझसे जो बंधे थे अडिग अटूट  […]

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