My Humming Word

Year: 2020

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Other day I was listening to a Pakistani journalist candidly speaking about a controversial Indian student activist of the Jawaharlal Nehru University namely Shehla Rashid who is well known for her anti-India tirade and open support to condemned terrorists and their nefarious activities in Kashmir and elsewhere in India. In essence what he said was […]
  1. Blog
Many fellow Indians must have forgotten by now the August 2018 arrest of five so-called civil rights activists by the Pune (Maharashtra) police in a nationwide crack-down for their alleged Maoist links in connection with the ‘Elgaar Parishad’ and ‘Bhima-Koregaon Violence’ about a year back. The police had then produced the arrested individuals in different […]

Good Reads

दिव्य आभा मानिंद है, यह सृष्टि का सुन्दर रूपयह दर्पण भी है, मानव की विवेकानुभूति अनूपघड़ी के बारह बजे, खुलते कितने ही पृष्ठ सफेदमानों क्षितिज पर हैं भविष्य की गाथा रचते छन्द. पुराना वर्ष थम गया, आधी रात के कोलाहल मेंनये का आगमन हुआ, प्रकाश की प्रथम पुंज मेंदिनों की एक कोमल डोर, बीते समय […]
कभी-कभार एक छोटी सीनोकझोंक अथवा वाक्कलहजीवन भर के अर्जित स्नेहऔर बेशकीमती दोस्ती-यारानाको भी चोटिल कर जाती है… यदि आप सच में प्यार करते होतो ऐसे में बिना देरी के सक्रिय होकरविश्वास वापस लाने की खुद पहल करें…दोस्त गुब्बारों जैसे ही होते हैंयदि आप कसकर नहीं पकड़तेतो वे कभी भी टूट सकते हैहमेशा के लिए छूट […]

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दिव्य आभा मानिंद है, यह सृष्टि का सुन्दर रूपयह दर्पण भी है, मानव की विवेकानुभूति अनूपघड़ी के बारह बजे, खुलते कितने ही पृष्ठ सफेदमानों क्षितिज पर हैं भविष्य की गाथा रचते छन्द. पुराना वर्ष थम गया, आधी रात के कोलाहल मेंनये का आगमन हुआ, प्रकाश की प्रथम पुंज मेंदिनों की एक कोमल डोर, बीते समय […]

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सूख चुके हैं प्रेमपात्र सब, मदिरा की गागर दे दो भूल चुका हूँ कौन कौन है, विस्मृति का आश्रय दे दो. ईश्वर सबकुछ भूल गया है, कृष्ण नही अब रथ पर हैंसत्य-प्रेम की राहों पर हम, फिर भी काँटे पथ पर हैं. जीवन बंधा-बंधा सा क्यों है, हाहाकार मचा यह क्यों है मानव संबंधों के तलतम  में, यह भूकंपी […]
लाख समझाने पर भी नहीं समझता आईना मेरा अंदर की टूटती नसें भी उकेर दीं बनाकर उसने दरकती लकीरें वो जो बैठे हैं गहरे दिल में मेरे आईना मेरा उन्हें भी हूबहू दिखाता है. कैसे छिपाऊँ दर्दे-दिल को सामने जब बैरी-मितवा हो ऐसा चुप हूँ मैं, चुप हैं वो, मंजर है खामोशी का यह कैसा. दिल की जिद है रग-रग में […]
समय चुप है अपनी निष्ठुरता लिए बदल रहा है निरंतर. तुम समय हो मेरे समय जिसने प्यार दिया अनंत डुबोकर किया एकाकार खुशियों से अमृत सुख की स्मृतियों से साँस साँस में चलती अनवरत सामीप्य की अव्यक्त अनुभूतियों से.     समय मेरा दूर असंबद्ध सा अबदर्शक सा बन बदल रहा है     सहारे तन के मन के     तुझसे जो बंधे थे अडिग अटूट  […]

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