My Humming Word

Month: January 2024

  1. Poem
चिर काल तक आप सबको पेश है मेरी हर शुभ प्रभात,बाइस जनवरी को भारत में, घटी बड़ी ऐतिहासिक बात।भावना मेरी परम सुखी हों सबके कुटुंब तात और मात,सीता जैसी भार्या हों आपकी, हों लक्षमण जैसे भ्रात।राम होकर भी राम को ढूंढते, क्यों हम दिन और रात,काम सा नहीं राम जग में, काम में बसती है […]
  1. Poem
यह ना पूछो हमसे इस दुनिया मेंहमने क्या-क्या होते हुए देखा है! दोस्त अचानक दुश्मन बन जाते हैंऔर दुश्मन, दोस्त दिखने लगते हैंफिर दुश्मन के दुश्मन मिलकरदोस्ती का स्वांग करते नजर आते हैं। रिश्ते जब स्वार्थ पर आधारित होंइन आँखों पर पट्टी चढ़ जाती हैजीवन भर के संबंध, सच्चे हितैषी हानिकारक प्रतिद्वंदी नजर आते हैं। फीके, […]
  1. Poem
न जाने क्यों कुछ लोग बात-बात पर दोस्त कहकरफिर दोस्ती की दुहाई देकरदोस्ती जैसे पवित्र बंधन कोबेशर्मी से शर्मसार करते हैंजाने क्यों कुछ  लोग..! इनके जीवन का सत्य तो हैकि खुद के संसारी जीवन मेंचाहिए इन्हें बस कुछ चाटुकारजो उनके आडम्बर पूर्ण जीवन उनके ओछे मन एवं अहं काकेवल पोषण मात्र करते रहें। सच में यही हैं […]
  1. Poem
मेरे देश और हृदय वासियों को हो नव वर्ष मुबारक,आप ही में मानता हूं, बैठा हैं मेरा जीवन उद्धारक। जीवन किताब में पूर्ण हुआ, अध्याय दो हजार तेईस,रहा हमदम हमारा हर दम, दी अपार अपूर्व बक्शीस। हो आभार ढलते को, उगते का स्वागत झुका के शीश,आप महात्माओं को परम् सुखद हो दो हजार चौबीस। रोम […]
  1. Article
The “Wild West” is a popular terminology, with the same terminology used worldwide freely to create movies, television serials, fantasy/video games, music albums, documentary, sitcom, comics, and so on, during the last several decades. The terminology as such is believed to have been evolved on the situation and circumstances in terms of the geography, history, […]

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सूख चुके हैं प्रेमपात्र सब, मदिरा की गागर दे दो भूल चुका हूँ कौन कौन है, विस्मृति का आश्रय दे दो. ईश्वर सबकुछ भूल गया है, कृष्ण नही अब रथ पर हैंसत्य-प्रेम की राहों पर हम, फिर भी काँटे पथ पर हैं. जीवन बंधा-बंधा सा क्यों है, हाहाकार मचा यह क्यों है मानव संबंधों के तलतम  में, यह भूकंपी […]
लाख समझाने पर भी नहीं समझता आईना मेरा अंदर की टूटती नसें भी उकेर दीं बनाकर उसने दरकती लकीरें वो जो बैठे हैं गहरे दिल में मेरे आईना मेरा उन्हें भी हूबहू दिखाता है. कैसे छिपाऊँ दर्दे-दिल को सामने जब बैरी-मितवा हो ऐसा चुप हूँ मैं, चुप हैं वो, मंजर है खामोशी का यह कैसा. दिल की जिद है रग-रग में […]
समय चुप है अपनी निष्ठुरता लिए बदल रहा है निरंतर. तुम समय हो मेरे समय जिसने प्यार दिया अनंत डुबोकर किया एकाकार खुशियों से अमृत सुख की स्मृतियों से साँस साँस में चलती अनवरत सामीप्य की अव्यक्त अनुभूतियों से.     समय मेरा दूर असंबद्ध सा अबदर्शक सा बन बदल रहा है     सहारे तन के मन के     तुझसे जो बंधे थे अडिग अटूट  […]

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