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I have come across umpteen posts of proclaimed writers, thinkers and strategists on Afghanistan take over by Taliban. Kabul fell to Taliban apparently without any resistance or firing of a bullet. While most people are clueless about the whereabouts of Afghan President, cabinet ministers and other influential people; nearly, everyone has concluded the development as […]

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जीवन में सबसे दुखद बातें थीपहले प्यार, इसके बाद दोस्ती खोनालेकिन फिर गुजरते समय के साथप्यार एक अमूर्त भावना बनकर रह गयामैंने दोस्ती को भी फीका पड़ते देखाऔर अंतर्मन में ही पाया एक दोस्त –मेरा खुद का एकांत। सच है, मुझे एकान्त बहुत प्रिय हैक्योंकि मुझे कभी ऐसा मीत नहीं मिलाजो मेरा इतना साथ दे […]
Editor’s Pick एक चिरंतन मौन की गूंज सुनी है कभी?साँसें रुक जाती हैं, जीवन ठहर जाता हैएक शाश्वत, निर्विशेष प्रेम की महागाथानहीं, खुशी तो नहीं, गौरवपूर्ण अवश्य है। हाँ, जीवनवृत्त कोई असाधारण नहीं थाऐसा कुछ अद्भुत या अनूठा भी नहीं थापर कोई आम दुनियावी भी नहीं रहा थाजो भी था देखें तो प्रचुर था बहुमूल्य […]

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जीवन में सबसे दुखद बातें थीपहले प्यार, इसके बाद दोस्ती खोनालेकिन फिर गुजरते समय के साथप्यार एक अमूर्त भावना बनकर रह गयामैंने दोस्ती को भी फीका पड़ते देखाऔर अंतर्मन में ही पाया एक दोस्त –मेरा खुद का एकांत। सच है, मुझे एकान्त बहुत प्रिय हैक्योंकि मुझे कभी ऐसा मीत नहीं मिलाजो मेरा इतना साथ दे […]

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सूख चुके हैं प्रेमपात्र सब, मदिरा की गागर दे दो भूल चुका हूँ कौन कौन है, विस्मृति का आश्रय दे दो. ईश्वर सबकुछ भूल गया है, कृष्ण नही अब रथ पर हैंसत्य-प्रेम की राहों पर हम, फिर भी काँटे पथ पर हैं. जीवन बंधा-बंधा सा क्यों है, हाहाकार मचा यह क्यों है मानव संबंधों के तलतम  में, यह भूकंपी […]
लाख समझाने पर भी नहीं समझता आईना मेरा अंदर की टूटती नसें भी उकेर दीं बनाकर उसने दरकती लकीरें वो जो बैठे हैं गहरे दिल में मेरे आईना मेरा उन्हें भी हूबहू दिखाता है. कैसे छिपाऊँ दर्दे-दिल को सामने जब बैरी-मितवा हो ऐसा चुप हूँ मैं, चुप हैं वो, मंजर है खामोशी का यह कैसा. दिल की जिद है रग-रग में […]
समय चुप है अपनी निष्ठुरता लिए बदल रहा है निरंतर. तुम समय हो मेरे समय जिसने प्यार दिया अनंत डुबोकर किया एकाकार खुशियों से अमृत सुख की स्मृतियों से साँस साँस में चलती अनवरत सामीप्य की अव्यक्त अनुभूतियों से.     समय मेरा दूर असंबद्ध सा अबदर्शक सा बन बदल रहा है     सहारे तन के मन के     तुझसे जो बंधे थे अडिग अटूट  […]

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